नीतीश कुमार जी, राज्य द्वारा बनाये गए कानून और विधान केवल जनता के लिए ही नहीं अपितु राजा के लिए भी होने चाहिएं..

बिहार के गोपालगंज में जहरीली शराब से हुई १३ मौतों और शराबबंदी लागू किए जाने से लेकर अब तक हुई ३० मौतों ने नीतीश जी और उनकी सरकार के तमाम वैसे दावों की पोल खोल कर रख दी है जिसमें अब तक ये दावा किया जाता रहा है कि बिहार में शराबबंदी प्रभावी रूप से लागू है.

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बिहार में जनहित से जुड़े मुद्दे भी 'व्यक्ति-विशेष' के अंह की भेंट चढ़ रहे हैं, जनभावनाओं को हाशिए पर धकेल दिया गया है l सरकार की कार्य-शैली पर जब प्रश्न उठता है तो नीतीश जी का जबाव होता है कि "भ्रम फैलाया जारहा है, लोग भ्रम में न फंसें, सब ठीक चल रहा है l"

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Below are the unedited excerpts from the Facebook pages of two abiding friends since our JNU years in the 80’s. Kumar Narendra Singh and Ranjan Sharma are originally from Bihar and now settled down in their professional lives in New Delhi. We may not agree on everything but we have a lot of respect for each other’s views. Anxieties and concerns of friends like them should mean a lot to us. We are away from Bihar but Bihar is always within us.

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देश के वर्तमान परिपेक्ष में सबसे विश्वसनीय संस्था जो न्यायालय ही बच गयी है उसके एक अंग, एलाहाबाद उच्चतम न्यायालय के लखनौऊ खंडपीठ ने एक समादेश याचिका विचार के लिए स्वीकार कर ली है जिसमे आरोप लगाया गया है कि बहुजन समाज पार्टी के नेता के विरुद्ध भाजपा के एक नेता द्वारा कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग के विरुद्ध बहु. समा.पार्टी द्वारा संगठित विरोध प्रदर्शन में उनके समर्थकों नेअभद्र भाषा का प्रयोग किया जो कानून एवम संविधान के विरुध है.

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देश में दलित उत्पीड़न एक गंभीर मुद्दा है, खास तौर से उस स्थिति में जब सरकार ने आम जन से भय, भूख एवं भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने का वायदा किया है। सिर्फ दलित उत्पीड़न की घटनाओं को देखा जाए तो पिछले दो वर्षो में दलितों की पिटाई, दलितों का समाजिक बहिष्कार, दलित महिलाओं के साथ बलात्कार, उनकी बेदखली आदि जैसी कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जो बहुत ही शर्मनाक हैं।

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बिहार की सरकार काफी समय से नक्सलवाद को महज कानून और व्यवस्था की समस्या कह कर इसकी भयावहता का सही अंदाजा लगाने में नाकामयाब रही है l बिहार में भी इनकी (नक्सली) सत्ता के आगे राज्य सरकार बेबस है, औरंगाबाद का हालिया नक्सली हमला इसका ताजा- तरीन उदाहरण है l

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२०१२ के विधान -सभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में २१९ सीटों पर चुनाव लड़ी थी नीतीश जी कीपार्टी जनता दल यूनाइटेड .... नतीजा क्या था?इसपर गौर फरमाने की जरूरत है ....

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Even a novice understands the politics behind throwing a sumptuous Iftaar feast by Nitish Kumar at his official residence as the Chief Minister of Bihar. He’s not the only politician to have done so. The Congress CMs, and his foe-turned-mentor Lalu before him, had routinely hosted Iftaar or Eid-ul-Fitra party at the conclusion of the holy month of Ramazan. The leaders of the BJP, a party reputed as unfriendly to Muslims also break bread with the Muslim invitees on this occasion.

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I feel laughing… I feel kicking… I feel spitting… I mean I want to do all nasty things when I come across people who play ignorance or act oblivious of, and when you have reasons to believe that the particular incident has been in their knowledge constantly for decades together. Yet they didn’t even hiss about it till someone else brings the incident to light. It is this social double standard that Bihar would go down with in contemporary history of independent India.

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