नीतीश कुमार जी, राज्य द्वारा बनाये गए कानून और विधान केवल जनता के लिए ही नहीं अपितु राजा के लिए भी होने चाहिएं..

बिहार के गोपालगंज में जहरीली शराब से हुई १३ मौतों और शराबबंदी लागू किए जाने से लेकर अब तक हुई ३० मौतों ने नीतीश जी और उनकी सरकार के तमाम वैसे दावों की पोल खोल कर रख दी है जिसमें अब तक ये दावा किया जाता रहा है कि बिहार में शराबबंदी प्रभावी रूप से लागू है.

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बिहार में जनहित से जुड़े मुद्दे भी 'व्यक्ति-विशेष' के अंह की भेंट चढ़ रहे हैं, जनभावनाओं को हाशिए पर धकेल दिया गया है l सरकार की कार्य-शैली पर जब प्रश्न उठता है तो नीतीश जी का जबाव होता है कि "भ्रम फैलाया जारहा है, लोग भ्रम में न फंसें, सब ठीक चल रहा है l"

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देश में दलित उत्पीड़न एक गंभीर मुद्दा है, खास तौर से उस स्थिति में जब सरकार ने आम जन से भय, भूख एवं भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने का वायदा किया है। सिर्फ दलित उत्पीड़न की घटनाओं को देखा जाए तो पिछले दो वर्षो में दलितों की पिटाई, दलितों का समाजिक बहिष्कार, दलित महिलाओं के साथ बलात्कार, उनकी बेदखली आदि जैसी कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जो बहुत ही शर्मनाक हैं।

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बिहार की सरकार काफी समय से नक्सलवाद को महज कानून और व्यवस्था की समस्या कह कर इसकी भयावहता का सही अंदाजा लगाने में नाकामयाब रही है l बिहार में भी इनकी (नक्सली) सत्ता के आगे राज्य सरकार बेबस है, औरंगाबाद का हालिया नक्सली हमला इसका ताजा- तरीन उदाहरण है l

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२०१२ के विधान -सभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में २१९ सीटों पर चुनाव लड़ी थी नीतीश जी कीपार्टी जनता दल यूनाइटेड .... नतीजा क्या था?इसपर गौर फरमाने की जरूरत है ....

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शिक्षा के कारोबार का काला-धंधा देशव्यापी समस्या है, ये सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं है l निःसन्देह ये दुःखद है कि हालिया टॉपर्स प्रकरणसे बिहार की बदनामी हुई है और बिहारजगहँसाई का पात्रबना दियागया हैl मगर ऐसा नहीं है कि ऐसा देश के किसी और राज्य में नहीं होता या नहीं हुआ है, अनेकों उदहारण हैं लेकिन उनको इतना तुल नहीं दिया जाता और ना ही उनको आधार बना कर वहाँ की मेधा पर सवाल खड़े किए जाते हैं l ऐसा क्यूँ? ...बिहार के प्रति पूर्वाग्रहया बिहार की मेधा से लगातार हर क्षेत्र में पिछड़ते जाने से उत्त्पन्न ढाह?

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कल राजद संसदीय दल की बैठक के बाद वरिष्ठ राजद नेताओं ने नीतीश कुमार को सीधे अपने निशाने पर लियाl संकेत कुछ अच्छे नहीं हैं नीतीश जी के लिए...

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सीवान में हुई पत्रकार राजदेव जी की हत्या के तार सीधे तौर से वर्षों से जेल में बंद अपराधी से नेता बने दुर्दांत शहाबुद्दीन से जुड़ते दिख रहे हैं l जेल में बंद रहने के बावजूद सीवान और इसके आस-पास के इलाकों में शहाबुद्दीन का नेटवर्क कभी भी कमजोर नहीं हुआ और अभी भी बेलगाम हो कर काम कर रहा है l विगत वर्षों में अनेकों हत्याएं शहाबुद्दीन से जुड़े गुर्गों ने बेख़ौफ़ हो कर की हैं l सुशासन के तमाम दावों के बावजूद जेल में बंद अपराधी सरगनाओं व् आपराधिक पृष्ठ-भूमि वाले नेताओं का तांडव बिहार में बदस्तूर जारी ही रहा है, ये सुशासन की सार्थकता पर बड़ा प्रश्न-चिन्ह है?

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आज हिन्दी साहित्य के ओज-पुरुष राष्ट्र कविरामधारी सिंह 'दिनकर' जी की पुण्य-तिथि है.... हिन्दी साहित्य की बात तो क्या भारत में साहित्य (किसी भी भाषा) की कोई भी चर्चा दिनकर जी की चर्चा के बिना अधूरी है. अजीब विडम्बना है दिनकर जी की कृतियों पर दशकों पहले से विदेशों में शोध हो रहे हैं, अनेकों विदेशी विश्वविद्यालयों व शोध-संस्थानों में 'दिनकर-चैपटर्स' हैं लेकिन अपने ही देश और अपनी ही मिट्टी बिहार में दिनकर जी की याद लोगों को सिर्फ जयंती व पुण्य-तिथि पर आती है l

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