अगर जुटी हुई 'भीड़' चुनावी नतीजों के आक्लन का  पैमाना है तो कल दिनांक ३०.०८.२०१५ को  पटना में महागठबंधन (राजद–काँग्रेस–जदयू) के द्वारा आयोजित स्वाभिमान रैली की भीड़ आसन्न विधानसभा चुनावों के संदर्भ में एनडीए, विशेषकर भाजपा, के लिए कुछ अच्छे संकेत देती हुई नहीं दिखती है l

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आजसे पाँच दिनों पहले, रविवार ९ अगस्त २०१५ को, गया की रैली में बिहार के पिछले २५वर्षों के शासनकाल कोजंगलराज, कुशासन और बिहार की बदहाली का कारण बता करप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो भाजपा की प्रदेश इकाई को सांसत में ही डाल दिया है l

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The ongoing monsoon session once again proved that there is arrogance in the BJP, their floor management is extremely poor and they have failed to accept that they do not have a majority in the Rajya Sabha.

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The gap between the emerging narrative of a new politics and the actual behaviour of political parties suggests that the actual situation is thus far more nuanced than many assume. What has been happening on the ground (or rather in the closed rooms where political deals are struck) shows that the actual players in the political game are far more sceptical than assorted pundits about the inevitability of a new politics liberated from the bonds of identity, political dynasty, criminality, caste and corruption.

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जहर पीने की बात तो लालू जी ने की थी लेकिन अब नीतीश जी उनको ही विषधर बता रहे हैंl ऐसे में इस 'जहरीले गठबंधन' का हश्र क्या होने वाला है सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है l

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सेवा नहीं, खुद के लिए मेवा का जुगाड़ ही आज की राजनीति है l मेवा खाने की तड़प ही राजनीति की ओर खींच लाती है l आज राजनीति का मूल-मंत्र क्या है "मेवा नहीं तो सेवा नहींl" पिछले अड़सठ सालों में हमारी किसी भी सरकार, हमारे किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी ऐसा ठोस कदम नहीं उठाया जिससे राजनीति से भ्रष्टाचार की  कुप्रथा खत्म होनी तो दूर, जरा सी कमजोर भी हुई हो l कहा तो खूब जाता रहा कि भ्रष्ट तौर-तरीकों को राजनैतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए l लेकिन हमारे देश में परिस्थितियाँ ऐसी बनाई गयीं कि बिना  भ्रष्टाचार के राजनीति की कल्पना भी न की जा सके l

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चुनावी-मौसम में बिहार के निजाम नीतीश कुमार जी का मिजाज भी बदला हुआ दिख रहा हैआज नीतीश जी एक बार फिर से अपराध व अपराधियों के प्रति'जीरो-टोलरेंसकी बातें करते दिख रहे हैंऐसी प्रतिबद्धता अगर नीतीश जी की तरफ से उनके शासन के बीते हुए वर्षों में भी दिखती तो शायद आज बिहार की तस्वीर  ही कुछ और होती !!

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Yesterday when I asked a senior but dissident and still in the party JD-U leader: "Will Nitish' image of a progressive man and popularity going to work in his favour?", he replied: "Nitish Kumar does not enjoy the support of any numerically and socially strong community in Bihar. He doesn’t even command a hundred percent faith and loyalty of his own Kurmi community which, anyway, is just a little over three percent of the population of Bihar.

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आसन्न बिहार विधान सभा चुनावों में अति-पिछ़ड़ी जातियों के मतदाता निश्चित तौर पर निर्णायक भूमिका में रहेंगे । द्रष्टवय है कि ९० के दशक से यहाँ जो भी राजनीतिक पार्टी चुनावों में आगे रही है, उसके वोट-बैंक में एक बड़ा हिस्सा अति-पिछ़ड़ी जातियों के मतदाताओं का रहा है। आज भी बिहार में कोई भी चुनावी समीकरण इन मतदाताओं को नजर अंदाज कर नहीं बन सकता है ।

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"Sab ka Saath Sab ka Vikas" sounds hollow, if things do not improve all around. There is nothing significant being done in the one-year tenure of the Modi government. Everyone’s asking the question on the much-hyped "Achche Din" promise: "Where are the achche din?"

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कल जब दिल्ली के ‘मुख्य-संतरी’ और आम आदमी नौटंकी पार्टी’ के संचालक श्री अरविंद केजरीवाल को जनता का रिपोर्टर’ कार्यक्रम (प्री-रिकोर्डेड) में टीवी पर बोलते सुना तो मुझे पक्का विश्वास हो गया कि अब कलयुग खत्म हो चुका है और भट्ठ-युग’ अपने परवान पर है l

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दो दिनों पहले पटना में एक समारोह में भाजपा नेता श्री सुशील कुमार मोदी के संसदीय जीवन के २५ साल पूरे होने पर एक अभिनंदन समारोह का आयोजन खुद सुशील मोदी के द्वारा ही आयोजित किया गया चंद दिनों पहले एक ऐसा ही आयोजन नीतीशजी के ३० साल के संसदीय जीवन के उपलक्ष्य में नीतीश जी के चहेते शैवाल गुप्ता की कथित समाजसेवी संस्था आद्री के परिसर में आयोजित किया गया था l

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पिछले साल २५ दिसम्बर को स्वर-कोकिला लता दीदी ने अटलजी को उनके जन्मदिवस व भारत-रत्न से विभूषित किए जाने की घोषणा पर अपने बधाई संदेशमें सियासत का संतकहकर संबोधित किया था l इस कड़ी को ही आगे बढ़ाते हुए मेरामानना है कि बिल्कुल औघड़दानी" हैं अटल जी, जहाँ भी गए उसको ही अपना लिया , वहींमें रम गए, वहीं के लोगों को अपना बना लिया

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