पिछले साल २५ दिसम्बर को स्वर-कोकिला लता दीदी ने अटलजी को उनके जन्मदिवस व भारत-रत्न से विभूषित किए जाने की घोषणा पर अपने बधाई संदेशमें सियासत का संतकहकर संबोधित किया था l इस कड़ी को ही आगे बढ़ाते हुए मेरामानना है कि बिल्कुल औघड़दानी" हैं अटल जी, जहाँ भी गए उसको ही अपना लिया , वहींमें रम गए, वहीं के लोगों को अपना बना लिया

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कभी 'खींचो न कमान न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अख़बार निकालो' कहने वाले अकबर इलाहाबादी ने अख़बारों से मोहभंग होने के बाद उन पर व्यंग्य करते हुए कहा था कि 'मियां को मरे हुए हफ्ते गुजर गए, कहते हैं अख़बार मगर अब हाले मरीज अच्छा है’ l

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Today Congress boycotted the house and the proceedings on the farce Snoop Case; it was a clear case of a dynastic-centric party wasting the valuable time of parliament on a non-issue. In fact, Congress is trying too hard to cover its embarrassment on Rahul’s absence from the country and the House during the all important budget and the Land Acquisition sessions.

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आज दोपहर बिहार के 'सरकारी उपवासकार्यक्रम-स्थल पर जाने काथोड़ी देर केर लिए ही सही, 'पुण्यमैंने भी किया. उपवास-स्थल के बाहर तो मेले सा दृश्य थासरकारी अमला भी पूरी तरह चौकस थाएम्बुलेंसें भी दिखीं और मुस्तैद डॉक्टरों का जत्था भी. सब के सब बिल्कुल 'अलर्ट' , हों भी क्यूँ ना रोज 'जम कर खाने वालेआज 'उपवासपर जो थे.

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नीतीश जी की कथनी व करनी में विरोधाभास का पुट ढूँढने के लिए कोई बहुत ज्यादा माथा-पच्ची व मशक्त नहीं करनी पड़ती l नीतीश जी का पूरा राजनीतिक सफर व मुख्य-मंत्री के रूप उनका कार्यकाल विरोधाभासों से पटा पड़ा हैl

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"अन्ना की अपनी सीमितताएँ हैं, उनकी अपनी कोई सोच या कोई स्पष्ट-विजन नहीं है"l मुझे तो पूरा विश्वास है कि भूमि अधिग्रहण कानून की पेचीदगियों से अन्ना पूरी तरफ से वाकिफ भी नहीं होंगे l

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माँझी-नीतीश के बीच कुर्सी की 'हाई-वोल्टेज' लड़ाई में नीतीश जी लगातार ये कहते दिख रहे हैं "बिहार में संवैधानिक संस्थाओं वपरम्पराएँ मज़ाक बन कर रह गई हैं" l उनका इशारा किस संवैधानिक संस्था की ओर है इसे, नीतीश-माँझी प्रकरण के संदर्भ में समझना 'रॉकेट-साइन्स' के गूढ विज्ञान जैसा जटिल भी नहीं है, लेकिन नीतीश जी के मुँह से ऐसी बात सुन कर हँसी आना, हतप्रभहोना तो लाजिमी ही है l

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी कीइस सुपर लैंड-स्लाईड विक्ट्रीसे ये स्पष्ट है कि जनता के मिजाज और नब्ज को केजरीवाल और उनकी टीम ने बाकी सबोंसे बेहतर भाँपा l इस सबमें केजरीवाल विरोधी पार्टियाँ भी हैं, मीडिया का वो तबका भी है जो आम आदमी पार्टी की जीत का आक्लन तो कर रहा था लेकिन उसे भी ऐसीजीत की उम्मीद नहीं थी, मीडिया का वो तबका भी हैजिसे आम आदमी पार्टी की जीत का संशय था और संशय की वाजिब वजहें भी थीं, इसमें मैं भी शामिल था l

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बिहार में पिछले नौ सालों से ऊपर के ‘सुशासनी शासनकाल में और कुछ तो फला-फूला नहीं ही लेकिन राजनीति, सत्ता और सरकारी महकमों के संरक्षण में शराब के वैध-अवैध कारोबार ने बेशक नई ऊंचाईयाँ हासिल कीं। आज आलम ये है कि शहर के गली-मुहल्लों से लेकर सूबे के ग्रामीण इलाकों तक में अगर कोई एक चीज सबसे सुलभता से उपलब्ध है तो वो शराब ही है।

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प्रदेश की राजधानी पटना समेत पूरे प्रदेश में शीतलहर का कहर जारी है । लगातार गिरते पारे और तेज पछुवा हवा ने लोगों को घरों में कैद कर दिया है। खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर गरीब-बेसहारा लोगों के लिए ठंड जानलेवा साबित हो रही है।

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लोकसभा चुनाव व उसके उपरांत हरियाणा व महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में जिस कदर नरेंद्र मोदी के आह्वान पर भाजपा को लोगों ने अपना समर्थन दिया और अब झारखण्ड एवं जम्मू-कश्मीर के एक्ज़िट-पोल जैसे नतीजों की ओर इशारा कर रहे हैं उसे देख कर ये कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि भारतीय मतदाताओं में मोदी की स्वीकार्यता बाकी सबों पर भारी पड़ रही है l

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ये ज्ञातव्य है कि बिना किसी स्पष्टविजन के दो बार संसदीय राजनीति में कथित तीसरे मोर्चे की सरकार तो बनी लेकिन स्वहितव जोड़तोड़ की राजनीति के परिणामस्वरूप आपस में हुई राजनीतिक वर्चस्व की टकराहटके कारण कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी सवाल ये है कि वर्तमानपरिदृश्य में जिस तरह मोदी बनाम दूसरे सबका समीकरण उभर कर आ रहा है, उसमें किसीवैकल्पिक फ्रंट की कितनी गुंजाईश बैठ पाएगी?

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