आज पूरा उत्तर-पूर्व भारत बिजली की संकट से जूझ रहा हैबिहार में भी स्थिति भयावहहै स्वाभाविक भी है क्यूंकी बिहार में सुचारु रूप से काम कर रही बिजली उत्पादन कीकोई भी इकाई नहीं है बिहार में नयी केन्द्रीय परियोजनाओं से उत्पादन की शुरुआत मेंभी अभी देरी है और राज्य सरकार की उत्पादन - इकाईयाँ भी बदहाली और बंदी की कगार परही हैं l

Read more ...

बिहार में इंसेफेलाइटिस का कहर हरेक साल की तरह इस साल भी जारी है बिहार सरकार की मानें तो अब केवल ४०-५० मौतें हुई हैं जबकि मुजफ्फरपुर और गया के भिन्न इलाकों में मौजूद पत्रकार मित्रों व सूत्रों के अनुसार संख्या इससे कहीं ज्यादा है लगभग १०० के करीब l

Read more ...

नैतिकता की आड़ में इस्तीफे की नौटंकी का सच नैतिकता कीदुहाई देने वाले नीतीश खुद विरोधाभास की राजनीति के द्योतक हैं। यदि नैतिकता केआधार पर त्यागपत्र देना ही था तो उन्हें उस वक्त ही दे देना चाहिए था जब उन्होंनेभाजपा से गठबंधन तोड़ा था क्यूँकी जनमत सिर्फ उनके अकेले के लिए नहीं था ।

Read more ...

नयी सरकार से उम्मीदें और सरकार को जनता के सुझाव जिस अपारबहुमत के साथ जनता ने मोदी जी के नेतृत्व में नयी सरकार को चुना है उससे स्पष्ट हैकि जनता की अपेक्षायें काफी बड़ी और बढ़ी हैं ,मोदी जी भी उसे भली – भाँति समझ रहेहोंगे l

Read more ...

भारतीय जनता पार्टी ने एक स्पष्ट एजेंडे के साथ चुनाव में जाने का फैसला कियामोदी के नेतृत्व में और मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करयहाँ काँग्रेस वाली भ्रम की स्थिति नहीं थी भाजपा ने अपना एक प्रधानमंत्री का उम्मीदवार जनता के समक्ष रखा और उस के नाम पर जनता से बहुमत की गुजारिश की और अगर मोदी के नाम पर भाजपा की सरकार बनती है तो मोदी जनता के द्वारा चुने हुए प्रधानमंत्री साबित होंगे ना कि हाई कमान के द्वारा थोपे हुए प्रधानमंत्री l

Read more ...

पटना के राजनीतिक व मीडिया के गलियारों में ऐसी चर्चा ज़ोरों पर है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक बड़ा विघटन तीर वाली पार्टी में होगा (इसका जिक्र मैंने महीनों पहले अपने एक स्तम्भ में भी किया था) अगर मेरी और मेरे सूत्रों की मानें तो शरद यादव का इस पार्टी से रुखसत होने में महज एक औपचारिकता मात्र भर शेष है l

Read more ...

सुशासन की सरकार और सुशासनी प्रशासन ने बिहार में शराब बेचने की खुली छूट दे रखी है l सच्चाई तो ये है कि शराब बिक्री के बहुत बड़े हिस्से पर अवैध कारोबारियों का ही कब्ज़ा है, जिनकी प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों और अन्य सरकारी बाबुओं से साठ-गाँठ हैl जाहिर है इस कमाई में सबका अपना-अपना हिस्सा होता हैl जिस तरह आज बिहार में गाँव-गाँव, शहर-शहर, मोहल्ले–मोहल्ले, नुक्कड़-नुक्कड़ शराब मिल रही है या बेची जा रही है, उसने शराब पीने की प्रवृति को निःसंदेह बढ़ावा दिया हैl

Read more ...

बिहार में आतंकवाद का फलना-फूलना सामाजिक परिवेश से तालुक्क नहीं रखता हैसामाजिक परिवेश में समरसता की कौन सी परिभाषा आतंकवाद के पोषण और अनदेखी की बात करती हैदोनों भिन्न मूद्दे हैं l

Read more ...

देश में कई सुधारों के लिए अग्रणी बिहार का पतन आजादी के कुछ सालों बाद ही शुरूहो गया था । लेकिन 1989 में गैर कांग्रेसवाद सामाजिक न्याय के नाम पर और मण्डलकमीशन के रथ पे आरूढ़ हो कर सत्ता के सिंहासन पर आए लालू प्रसाद यादव जी और उनकेकुनबे ने बिहार की हालत बद से बदतर कर दी ।

Read more ...

नीतीश खुद को विकास पुरुष’ के रूप में चाहे जितना पेश करें लेकिन उन्होंने विकास का कोई नयाज्यादा समावेशीऔर टिकाऊ मॉडल नहीं पेश किया है। उनकी विकास नीति किसी भी रूप में केन्द्र की यूपीएसरकार से अलग नहीं है।

Read more ...

चलते-फिरते उठते-बैठतेखाते-पीतेसोते -जगाते केवल अल्पसंख्यकों के हिमायतीऔर रहनुमा बनने का दिखावे करने वाले नीतीश कुमार जी से बिहार के अल्पसंख्यकों को येसवाल जरूर पूछना चाहिए कि -

Read more ...

बिहार में विकास पर हावी जाति की राजनीति बिहार में अहमराजनीतिक मुद्दों की बात की जाए तो जातिवाद बहुत ही हावी हैहर पार्टी एक खासजाति को साथ लेकर चलती है और ज्यादातर मामलों में उसी जाति को सहयोग देती नजर आतीहै ऐसा यहाँ एक पार्टी नहीं बल्कि सभी पार्टियां करती हैं l

Read more ...

सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड और बिहार की मीडिया हाल में बिहार के सारे अखबारों ने आठ सालों के सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड” को जिस तरीके से परोसा वो अपने आप ही सुशासन के मीडिया-मैनेजमेंट की सच्चाई को बयाँ करता हैपढ़ने के बाद यही लगा है कि मीडिया अपनी आलोचक और प्रहरी की भूमिका को पूर्णरूप से भूलकर “दरबारी” की भूमिका बखूबी निभा रहा है l

Read more ...

PhotoGallery

photogallery module

Your Favorite Recipes on PD

Recipes

Latest Comments