नीतीश जी के नाम एक खुला पत्र

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"Poverty is a curse, must be eradicated" says नीतीश जी....

ये तो हम सबजानते हैं कि गरीबी अभिशाप है ....बेहतर होता आप ये बताते कि आपकी सरपरस्ती के नौसालों के शासन में इसके उन्मूलन के लिए आपने और आपकी सुशासनी सरकार ने कौन-कौन सेसार्थक पहल किए और उनका प्रतिफल बिहार की गरीब जनता को क्या मिला?

आपके विकास केदावों की पोल खुल चुकी है, सेमिनारों और सभाओं की खोखली बातों से जनता ऊब चुकी हैऔर इससे किसी का पेट भी नहीं भरने वाला. गरीब, गरीबी और गरीबी रेखा, आय-व्यय, कैलौरी , कुपोषण, अर्द्ध-भुखमरी व भूख से मौतों जैसे मुद्दों पर आपके शासन काल मेंअनेकों सेमिनार व समीक्षा बैठकों का दौर चला लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है.

एककरबद्ध अनुरोध भी है आपसे कृप्या कर सरकारी अनुदान पर परजीवी की तरह पल रहे एवंआपकी 'ठकुर-सुहाती में लिप्त NGOsऔर पैसे के दम पर वातानुकूलित कक्षों मेंबैठ कर आपका स्तुति गान करने वाले तथाकथित विदेशी अर्थशास्त्रियों के टाईम-पास काशगल बनाकर गरीब और गरीबी का माखौल मत उड़ाइए.

सच तो ये है कि गरीबी के लिहाज से आजभी बिहार का देश में दूसरा नंबर है. यहाँ आज भी चार करोड़ 38 लाख 10 हजार लोग गरीबीरेखा के नीचे हैं. राज्य में तीन करोड़ 76 लाख 80 हजार गरीब ग्रामीण क्षेत्रों मेंहैं तो शहरी क्षेत्र में यह संख्या 61 लाख 40 हजार है.समीक्षा के मुताबिक, आपकेसुशासन और समग्र विकास के दावों के बावजूदबिहार में करीब एक तिहाई आबादी गरीबीरेखा से नीचे गुजर बसर कर रही है. इसमें 2011 के तुलना में महज 1 फीसदी की गिरावटआई है.बिहार की आबादी लगभग 11 करोड़ हो गई है. भारत में रहने वाले छह गरीबों में सेएक बिहारी है, यदि ग्रामीण निर्धनता की बात करें तो यह अनुपात पांच में से एक होताहै. कुल ग्रामीण आबादी की एक बटा पांच से ज्यादा आबादी बेहद निर्धन हैं, इनका औसतमासिक प्रति व्यक्ति खर्च मात्र 390 रुपए है.

यूएनडीपी की ह्यूमन डेवलेपमेंटरिपोर्ट के मुताबिक बिहार भारत के आठ उन गरीब राज्यों में शामिल है जहाँ सब सेज्यादा भूखे लोग रहते हैं और जहाँ गरीबी निरंतर बढ़ रही है. गौरतलब है कि यूएनडीपीकी नजर में गरीब का मतलब उन परिवार से है जो हर रोज एक डॉलर से कम आमदनी पर गुजाराकरता है.

यूएनडीपी की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि यहाँ के लोंगों की वहीस्थिति है जो अफ्रीकी देश इथोपिया और तंजानिया में रहने वाले गरीब लोगों की है. यहाँके लोगों को ना तो स्वास्थ्य की सुविधा है और ना ही शिक्षा की, यहाँ तक की इन लोगोंको पीने का शुद्ध पानी भी नहीं मिल पा रहा है.

ब्रिटेन की ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटीकी ओर से कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार 49 सबसे गरीब देशों से भी गरीब है बिहार.सर्वेक्षणकर्ताओं ने पाया कि यहाँ गरीब से भी गरीब श्रेणी के लोग हैं, ऐसे लोगहैंजो गरीबी के कारण अपने दो से ज्‍यादा बच्‍चों को खो चुके हैं, जिनके पाससंपत्ति के नाम पर कुछ भी नहीं है.

मुझे अभी भी अच्छी तरह से याद है और शायद आपकोभी होगा कि पटना में आयोजित ग्लोबल मीट में बतौर मुख्यमंत्री आपने ही कहा था कि "हमारे विकास का असली मकसद अंतिम आदमी का विकास है." क्या हुआ उस मकसद का? क्या येआंकड़े और दुखद तथ्य आपकी सरपरस्ती में बिहार में हुए विरोधाभासी विकास को नहींदर्शाते और आपके विकास के दावों की कलई नहीं खोलते?

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