‘स्मार्ट-सिटी’ की महती परियोजना और बिहार

Typography

केंद्र – सरकार ने पूरे देश में १०० स्मार्ट-सिटी विकसितकिए जाने की घोषणा की है भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के सचिव का इसीसंदर्भ में बिहार का दौरा सोमवार (१५.०९.२०१४) को प्रस्तावित है सूत्रों की मानेंतो बिहार के तीन शहरों पटनागया और भागलपुर का चयन इस प्रयोजन हेतू सुनिश्चित हैलेकिन बिहार सरकार ११ शहरों के लिए अपनी दावेदारी रख रही है l

 

केंद्र पर दबाबबनाने की रणनीति के तहत बिहार सरकार की दावेदारी एक अच्छी पहल है, लेकिन ११ कीसंख्या पर केंद्र राजी होगा ऐसा लगता नहीं है और ये तार्किक भी नहीं है क्यूँकि इसमहती योजना के अंतर्गत देश के सारे राज्यों में ऐसे शहरों को विकसित करने की योजनाहै और एक ही राज्य को ११ की संख्या आवंटित करना बाकी राज्यों के साथ न्याय नहींहोगा l

बिहार के संदर्भ में उल्लेखित तीन शहरों के अलावा उत्तर बिहार एवं पश्चिमीबिहार से भी एक-एक शहर का चयन किया जाना चाहिए l पटना (मध्य बिहार) राजधानी है औरइसका चयन स्वाभाविक है, गया (दक्षिणी बिहार) की पर्यटन व आस्था के मद्देनजर एकअलग ही महत्ता है और ये इंटरनेशनल टूरिस्ट मैप पर है, भागलपुर (पूर्वी बिहार)पूर्वी बिहार का व्यापारिक केंद्र बिन्दु सदियों से रहा है और अपने सिल्क उद्योगके लिए इसकी अंतरर्राष्ट्रीय पहचान है l ऐसे में उत्तर व पश्चिमी बिहार को नजरंदाजकर अगर कोई निर्णय लिया जाता है तो वो बिहार के साथ न्याय नहीं होगा l

उत्तर बिहारमें खाद्य-प्रसंस्करण उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं और अगर वहाँ स्मार्ट-सिटी विकसित होती है तो निश्चित ही दुनिया की नजर इस पर आएगी और उत्तर बिहार में विकासकी नई अवधारणाएँ मूर्त्त रूप लेती दिखेंगी l मेरे विचार में मुजफ्फरपुर इसके लिएसबसे उप्युक्त होगा, वैसे भी ये शहर अंग्रेजों के जमाने से आज की तारीख तक समस्तउत्तर बिहार की व्यापारिक व प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र रहा है l

भोगौलिक रूपसे भी राज्य के बाकी हिस्सों से इसका संपर्क सुलभ है l नेपाल की अंतर्राष्ट्रीयसीमा से इसकी नजदीकी भी काफी अहम मायने रखती है l पर्यटन के मद्देनजर भी उत्तरबिहार का इलाका काफी अहम है, सीता जन्म-स्थली पुनौरा (सीतामढ़ी), बुद्धिस्ट सर्किटके स्थल केसरिया, वैशाली व लौरिया, गाँधीआश्रम भीतिहरवा, विश्व-विख्यातसोनपुर, दरभंगा राजघराने की धरोहरें, बिहार का एकमात्र टाइगर-प्रोजेक्ट वाल्मिकीटाइगर प्रोजेक्ट, आमी व थावे के शक्तिपीठ इत्यादि जैसे स्थल उत्तर बिहार कीदावेदारी को मजबूत करते हैं l

अब बात बिहार के पश्चिमी इलाके (सोन नदी के पार काइलाका) की.... ये इलाका धान के कटोरे के रूप में पूरे विश्व में अपनी पहचान रखताहै l इस इलाके में कुछ दशकों पहले तक औद्योगिक इकाइयों की भरमार थी (डालमियानगर, बक्सर, डुमरांव, सासाराम, ओबरा इत्यादि) लेकिन आज पूरे देश से अच्छी कनेक्टिविटी (द्रष्टव्य है कि राष्ट्रीय राज-मार्ग संख्या: २ इसी इलाके से होकर गुजरती है)और उद्योगों के लिए उत्तम भोगौलिक परिवेश होने के बावजूद ये इलाका उपेक्षित है l

पर्यटन की दृष्टि से भी इस इलाके में अपार संभावनाएं है, द्रष्टव्य है कि भारत काप्राचीनतम मंदिर माँ मुंडेश्वरी मंदिर, भारत के प्राचीनतम सूर्य-मंदिरों में से एकदेव सूर्य-मंदिर, ऐतिहासिक दृष्टि से अपने अनूठे स्थापत्यकला के लिए विख्यातसासाराम स्थित शेरशाह का मकबरा, इतिहास के अनेकों पन्नों को खुद में समेटेरोहतासगढ़ का किला, १८५७ की क्रान्ति के महानायक बाबु वीर कुँवर सिंह जी की जन्म वरणस्थली जगदीशपुर, भक्ति व आस्था का तीर्थ बखोरापुर इत्यादि इसे इलाके में हैं l अगर इस इलाके में स्मार्ट-सिटी जैसी कोई परिकल्पना मूर्त रूप लेती है तो ये इलाकानिश्चित ही एक बड़े व्यावसायिक व पर्यटन जोन के रूप में पूरे विश्व के सामने उभर करआएगा l मुझे पूरी उम्मीद है कि इन बिन्दुओं को ध्यान में रखकर ही केंद्र-सरकारकिसी नतीजे पर पहुंचेगी और बिहार को उसका वाजिब हक मिलेगा

BLOG COMMENTS POWERED BY DISQUS

PhotoGallery

photogallery module

Your Favorite Recipes on PD

Recipes

Latest Comments