अलंकरणों के अलंकरण हैं अटल

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पिछले साल २५ दिसम्बर को स्वर-कोकिला लता दीदी ने अटलजी को उनके जन्मदिवस व भारत-रत्न से विभूषित किए जाने की घोषणा पर अपने बधाई संदेशमें सियासत का संतकहकर संबोधित किया था l इस कड़ी को ही आगे बढ़ाते हुए मेरामानना है कि बिल्कुल औघड़दानी" हैं अटल जी, जहाँ भी गए उसको ही अपना लिया , वहींमें रम गए, वहीं के लोगों को अपना बना लिया

अटल जी जैसी निश्छल हँसी आज के जमाने में शायद ही देखने को मिले, सियासतदारों में तो कतई नहीं, अटल जी का निश्छल हृदय वउनका रमता जोगीजैसा विराट व्यक्तित्व उनकी हँसी में झलकता था, अफसोस...बढ़ती उम्र के साथ व्याधियों ने अटल जी को घेरा और हम उनकी निश्छल हँसी से मरहूम हो गए l अटल जी के ठहाके और उनकी बातों पर लगने वाले ठहाकों की अनेकों कहानियाँ हैं, खाने-पीने के शौकीन, ‘बाबा की बूटीका अमल, फिल्में देखने का जबर्दस्त शौक, कवि-हृदय, संगीत से प्यार, पत्रकार की कलम व भाषा, ओजस्वी वक्ता, हाजिरजवाब…. क्या कुछ समाहित नहीं था अटल जी के विराट और बरबस अपनी ओर खींच लेने वाले व्यक्तित्व में l

मुझे तो बाबा भोले नाथका आधुनिक-रूप (संस्करण)ही दिखताआया है अटल जी में l फ्लैश-बैक में जाता हूँ...छोटा था, इमरजेंसी का दौर था, अटल जी की सभाओं में पटना के गाँधी-मैदान में जाने का मौका नहीं चूकता था, उनदिनों आज की तरह सुरक्षा के चोंचले, दुश्वारियाँ व मजबूरियाँ नहीं थीं l अपने छोटेहोने के फायदा उठाते हुए बिल्कुल मंच से सटकर ही बैठता था, भाषण की बारीकियों की समझ तो नहीं ही थी बस अटल जी की भाव-भंगिमाओं को निहारा करता और ये सोचता इनमें कुछ खास तो जरूर है जो पब्लिक लगातार तालियाँ बजाए जा रही है l मैं भी ताली बजाने में किसी से पीछे नहीं रहता बल्कि औरों से कुछ ज्यादा ही बजाता, बिना प्रसंगवश भी, सिर्फ इस उम्मीद व लालसा में कि अटल जी की नजर मुझ पर भी पड़े l

भाषण के बाद भीड़ में बड़ों के पैरों के बीच से जगह बनाते हुए उनके पैर छूना नहीं भूलता था, यहाँ भी बाल-सुलभ लोभ था काश अपने गले में पड़ी हुई अनेकों मालाओं में कोई एक मेरे गले में भी डाल दें अटल जी (अटल जी की आदत थी वो अपनी मालाएँ दूसरों के गले में डाल देते थे )” l ऐसे ही एक मौके पर माला लेने में भी कामयाब हुआ और अटल जी ने मेरे सिर पर हाथ भी फेराकुछ दिनों के लिए अपने आप को मैंने अपने मित्रों-सहपाठियों के बीचहीरोसे कम नहीं समझा l

कालांतर में जब सोचने-समझने लायक हुआ तो अस्सी के शुरुआती दशक में अटल जी को काफी नजदीक से पटना में अनेक अवसरों पर देखा सुना और सोचता ये आदमी नेता कम रमता जोगीज्यादा है l अटल जी को जानने वाले एवं उन से जुड़े बिहार के लोगों से अटल जी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की जुगत में रहता, प्रदेश भाजपा कार्यालय के लोगों से संपर्क था और उन लोगों के कारण कार्यालयमें आना-जाना भी, जाने का प्रयोजन सिर्फ और सिर्फ अटल जी को देखना या उनके बारे में औरकुछ नया जानना होता l इसी क्रम में ये जाना कि बिहार के लोगों व बिहारी-व्यंजनों से अटल जी का काफी जुड़ाव है, ठेंठ बिहारी स्टाइल में बनी सरसोंदार मछली व पटना की एक बहुत ही पुरानी व नामी दुकान “NITAI SWEETS” (जो अब बंद हो चुकी है) के रसगुल्ले व समोसे भी अटल जी बहुत पसंद किया करते और कई अवसरों पर तो वो रिक्शे पर बैठ कर वहाँ पहुँच जाया करतेl

मुझे अभी भी अच्छी तरह से याद है उन दिनों भाजपा का प्रदेश कार्यालय पटना के राजेंद्र नगर इलाके के रोड नम्बर २ बी में रवीन्द्र बालिका विद्यालय के पीछे भारत के भूतपूर्व मुख्य-न्यायाधीश स्व. ललित मोहन शर्मा जी के परिजनों के मकान में हुआ करता था और बिहार में भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले स्व. कैलाशपति मिश्र और तत्कालीन बिहार से भाजपा के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसदस्व. अश्विनी कुमार जी वहीं रहा भी करते थे l अटल जी का जब भी वहाँ आना होता था उसके पहले से वहाँ माँसाहार बनाने की त्यारियाँ शुरू हो जाती थीं, मेन्यू में बिहारी स्टाइल मछली जरूर होती थी l

गया के तिलकुट और बिहार के दूधिया-मालदह आम भी अटल जी को बहुत भाते थे, भाते भी क्यूँ नहीं…! खुद इनका स्वभाव व व्यक्तित्व तिलकी ही सी गर्माहटऔर आम जैसे मिठास व मुलायमियतसे सराबोर जो है l दिलों पर राज करने वाले कालजयी अटल जी को नमन l आप हम सबों के बीच हैं यही देश का सौभाग्य है और धन्य हैं मेरे जैसे लोग और भारत-रत्न का पुरस्कार जिन्हें आपके स्पर्श का सौभाग्य प्राप्त हुआ है l अलंकरणों के अलंकरण हैं अटल जी आप l

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