महागठबंधन की स्वाभिमान रैली: “रैली एक, मायने अनेक”

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अगर जुटी हुई 'भीड़' चुनावी नतीजों के आक्लन का  पैमाना है तो कल दिनांक ३०.०८.२०१५ को  पटना में महागठबंधन (राजद–काँग्रेस–जदयू) के द्वारा आयोजित स्वाभिमान रैली की भीड़ आसन्न विधानसभा चुनावों के संदर्भ में एनडीए, विशेषकर भाजपा, के लिए कुछ अच्छे संकेत देती हुई नहीं दिखती है l

संख्या के लिहाज से देखा जाए तो गाँधी मैदान के अंदर ३ से ३.५ लाख की भीड़ और बाहर १.५ से २ लाख की अनुशासित भीड़ भाजपा के चुनावी–मैनेजरों एवं रणनीतिकरों को एक नए 'टास्क' के लिए बाध्य तो अवश्य करेगी l

गाँधी मैदान में जुटी भीड़ में ७५ से ८० फीसदी की संख्या लालू समर्थकों की थी और १५ से २० फीसदी लोग काँग्रेस समर्थक थे, नीतीश समर्थकों का अंदाजा आप सहज ही लगा सकते हैं l कल का पूरा 'शो' एक तरह से अपने नाम कर गए लालू यादव l कल जिस लहजे में श्री लालू यादव ने जातीय (विशेषकर यादव मतों की) गोलबंदी को केंद्र में रखकर अपने सम्बोधन के चिर-परिचित अंदाज में अपने विरोधियों के साथ–साथ मंच पर आसीन अपने गठबंधन के साथियों को भी इशारों ही इशारों में अपने निशाने पर लिया उसने एकबारगी पूर्व के लालू यादव की बरबस ही याद दिला दी l

कल श्री यादव अपनी पुरानी रौ में थे, वैसे भी लालू यादव अपनी आक्रामक, बेबाक और बिना लाग-लपेट वाली शैली के लिए ही जाने जाते हैं और हाल के दिनों में श्री  यादव के संबोधनों व भाव-भंगिमा में ये पुट देखने को नहीं मिल रहा था l एक अर्से बाद बिल्कुल ही अलग 'टोन' में बोलते दिखे श्री नीतीश कुमार, कल  नीतीश जी के सम्बोधन में मैं और मैंने शब्द का प्रयोग नहीं के बराबर हुआ, जो ये साफ संकेत देता दिखा कि चर्चाओं और अटकलों से इतर अपने कार्यकर्ताओं और वोटरों के बीच नीतीश कुमार के द्वारा ये संदेश देने की कोशिश थी कि “हम साथ-साथ हैं l”

नीतीश कुमार एक अर्से बाद अपने सम्बोधन के जरिए अपने धूर विरोधी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी व उनकी नीतियों व वादों पर सवालिया लहजे में बोलते हुए जनता से संवाद स्थापित करने की कोशिश करते हुए दिखेl ‘गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहाऐसी अटकलों पर स्थिति स्पष्ट करने की कवायद में श्री लालू प्रसाद ने भी भ्रम की स्थिति को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि “गठबंधन में कोई मतभेद, किसी तरह का कन्फ़्यूजन और कोई झगड़ा नहीं है और अब नीतीश के मन में धुक-धुकी नहीं रहना चाहिए l”

काँग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी जी के सम्बोधन में भी दिखा भीड़ से उपजा आत्मविश्वास, वैसे भी भीड़ देखकर राजनेताओं का लहजा बदल ही जाता है l कल जिस प्रवाह के साथ बिना लड़खड़ाए मोदी व मोदी सरकार पर तीखे हमले करते हुए काँग्रेस अध्यक्षा ने अपना पूरा सम्बोधन समाप्त किया वो निश्चित तौर पर लड़खड़ाती हुई प्रदेश काँग्रेस इकाई के लिए बूस्टर का काम करेगी l वैसे भी बिहार विधानसभा चुनाव के अपने चुनावी सर्वेक्षणों व समीक्षाओं में हम बतलाते आ रहे हैं कि बिहार में इस बार काँग्रेस पूर्व की अपेक्षा बेहतर करने जा रही है l

इस रैली की टाइमिंग भी चुनावी दृष्टिकोण से काफी अहमियत रखती है, प्रधानमंत्री की अगुवाई में एनडीए की दो चुनावी रैलियाँ बिहार में हो चुकी हैं और तीसरी रैली (भागलपुर में) भी ०१.०९.२०१५ को प्रस्तावित है l ऐसे में अपने कार्यकर्ताओं और अपने वोट-बैंक में नई ऊर्जा का संचार करने के लिए महागठबंधन पर एक दबाब भी कायम था और एक संगठित महती आयोजन चुनावी जरूरत भी l गठबंधन के विरोधाभासों के चलते कायम हो रही संशय और दुविधा की स्थिति का पटाक्षेप ही इस आयोजन के मूल में था और रैली में उमड़ी अपार भीड़ ने इस उद्देश्य को काफी हद तक फलीभूत होते हुए भी दिखाया l कल के इस आयोजन से निश्चित तौर पर एनडीए कुछ नई रणनीतियों पर सोचने-विचारने को मजबूर होगा और भाजपा पर सीधे तौर पर दबाब कायम होगा कि कैसे प्रधानमंत्री की भागलपुर की ०१.०९.२०१५ की प्रस्तावित रैली को इस आयोजन से बड़ा आयोजन बनाया जाए l

कल की रैली की दो बातें गौरतलब थीं:

१.     बहुतायत में युवा भागीदारी, वो भी तब जब राजनीतिक पंडितों व मीडिया के एक बड़े तबके के द्वारा ये कहा – सुना जा रहा है कि आज युवा-वर्ग लालू यादव की वजह से महागठबंधन और विशेषकर नीतीश कुमार से विमुख हो रहा है और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए में अपनी संभावनाएं तलाश रहा है l क्या कल की रैली में सक्रिय युवा भागीदारी युवाओं के बीच मोदी जी की फीकी पड़ती चमक का द्योतक तो नहीं? सवाल का जवाब भविष्य के गर्त में छिपा है और इसके लिए चुनाव - परिणामों का इंतजार रहेगा !! वैसे भी हमारा हमेशा से ये मानना रहा है कि कोई भी लहर भारत में बहुत दिनों तक कायम नहीं रहती है और बहुमत बड़ा होता है तो जन-आकांक्षाएँ भी बड़ी होती हैं और इसके साथ–साथ असंतोष भी वृहत व व्यापक स्वरूप में उभरता है, जिसका प्रतिफल चुनावों में प्रतिकूल परिणामों के रूप सामने भी आता है l

२.     दूसरी सबसे चौंकाने वाली बात जो कल  इस रैली में देखने को मिली वो थी बड़ी भीड़ का अनुशासन क्यूँकि राजद की रैलियों अपने उपद्रवी स्वरूप के लिए ही जानी जाती रहीं है l ऐसे ट्रैक–रिकॉर्ड के बावजूद राजद समर्थकों की बहुतायत के होते हुए भी कल जिस तरह से भीड़ और राजद कार्यकर्ताओं ने संयम और मर्यादा का ख्याल रखा वो कहीं ना कहीं ये तो जरूर दर्शाता है कि राजद का नेतृत्व, आम कार्यकर्ता और समर्थक अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलना चाहता है l इसे बिहार के राजनैतिक व सामाजिक संदर्भ में एक शुभ-संकेत माना जा सकता हैl

हम १९७५ से गाँधी मैदान में आयोजित सभाओं-रैलियों को देखते आ रहे हैं और कालांतर में अनेकों बड़ी रैलियों को हमने कवर भी किया है और एक पत्रकार की नजर से तटस्थ हो कर देखने पर हमें गाँधी मैदान की भीड़ का अनुमान लगाने में कोई बहुत माथापच्ची नहीं करनी पड़ती, ना ही हमें सोशल मीडिया पर मौजूद एडिटेड एवं मॉर्फ़ड तस्वीरों पर आश्रित रहना पड़ता है l पिछले दस सालों में नरेंद्र मोदी के बम-धमाकों वाली रैली के बाद कल की रैली संख्या के हिसाब से बिहार में आयोजित सबसे बड़ी रैली थी ये हम बेझिझक कह सकते हैं l एक बात और, दोनों रैलियों, नरेंद्र मोदी जी की २०१४ की रैली और कल की रैली में, के संख्याबल में कोई बहुत बड़ा फर्क हमें तो नहीं दिखा, मैदान के अंदर मौजूद भीड़ की बात की जाए तो अंतर उन्नीस-बीस का ही था l

आइए अब एक नजर डालते हैं कि कल की रैली में किसने क्या-क्या कहा और उनके निहित मायने क्या–क्या हैं :

शुरुआत करते हैं रैली में ‘स्टार–स्पीकर’ की भूमिका निभा रहे श्री लालू प्रसाद यादव से … वैसे देखा जाए तो लालू जी ने सबसे अंत में रैली को संबोधित किया लेकिन ये एक सोचे-समझे हुए प्लान का हिस्सा था क्यूँकि आयोजकों के मन में ये संशय कहीं न कहीं तो अवश्य ही होगा कि अगर श्री यादव का सम्बोधन पहले हुआ तो भीड़ बाकियों को सुनने के लिए नहीं रुकेगी l अनौपचारिक बात-चीत में इस बात से तो श्री यादव के धूर-विरोधी भी इत्तेफाक रखते हैं कि “भीड़ को बाँधे रखने का कौशल तो श्री यादव के पास अवश्य ही है l”

अपने संबोधन में राजद सुप्रीमो श्री लालू प्रसाद यादव ने कहा ''जब दो पिछड़ा जाति का बेटा (नीतीश व लालू) एक हो गया तो बीजेपी परेशान हो गई है। क्यों नहीं सरकार जाति जनगणना की रिपोर्ट सामने लाती है? दो पिछड़ा का बेटा जब एक हो गए तो जंगल राज कहते हो ! हम मोदी को बताने आए हैं यह जंगल राज पार्ट टू नहीं बल्कि मंडल राज पार्ट टू है। हमें जंगली कहते हो ! लड़ाई साफ-साफ लड़ के तय कर देंगे।''

उन्होंने गुजरात के मौजूदा आरक्षण आंदोलन का हवाला देते हुए आगे कहा कि “अभी कैसे हालात हैं गुजरात में ? सैकड़ों जान चलीं गईं कोई पटेल लड़का आंदोलन किया हुआ है। थोड़ी भी शर्म होगी तो बिहार में रैली नहीं करेगी भाजपा । भाजपा ‘भारत जलाओ पार्टी’ है।

भाजपा को चुनौती देते हुए श्री यादव ने आगे कहा “हिम्मत होती तो आज भागलपुर में रैली रखते।“ कालाधन व महँगाई के मूद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा “मेरी सात बेटी, दो बेटा और हम दो कुल ११, अगर काला धन हम लोगों के अकाउंट में आता तो हम बैठ कर खाते रहते। कहाँ गया अच्छे दिनों का वादा? अमित शाह जी ने बोल दिया कि यह तो जुमला था। झूठ बोल के आए थे बिहार में। दाल, प्याज गायब हो गया तो बोलते हैं कि योगासन करो, सूर्यनमस्कार करो। चांदी-सोना हो गया सस्ता पर दाल-प्याज महंगा।“

बिहार भाजपा के शीर्ष नेता और अपने छात्र –राजनीति जीवन के सहयोगी रहे श्री सुशील मोदी पर हमेशा की तरह हमला बोलते हुए श्री यादव ने कहा “पटना में सुशील मोदी बैठता है, क्या बोलता है - जब से लालू यादव आए हैं, कानून व्यवस्था खराब हो रहा है। यदुवंशियों पर इशारा कर रहा है। भैंस चराने वाले पर संदेह कर रहा है।“ 

जातीय जनगणना के मुद्दे पर श्री यादव ने कहा (श्रीमती सोनिया गाँधी जी की ओर इशारा करते हुए) “८४ साल बाद सोनिया जी ने जातीय जनगणना कराई, इसी सिलसिले में ४ जुलाई को बिहार बंद था... भारत के गांव में हर तीसरा परिवार भूमिहीन है। क्यों जाति–गणना नहीं बताई जा रही है?”

श्री यादव ने कालाधन के मूद्दे पर बाबा रामदेव, अन्ना हज़ारे और उनकी पार्टी का जिक्र माखौल के लहजे में करते हुए श्री नीतीश कुमार और श्री अरविंद केजरीवाल के बीच बढ़ती हुई नज़दीकियों पर भी इशारों ही इशारों में निशाना साधा l श्रीमती सोनिया गाँधी की ओर मुखातिब होते हुए उन्होंने जब ये कहा कि “मैडम और हमारे बीच कभी-कभी थोड़ा – बहुत झगड़ा होते रहता है फिर भी हम हर वक्त जरूरत पड़ने पर साथ खड़े रहे हैं” तो इसके माध्यम से लालू यादव साफ तौर पर नीतीश जी और काँग्रेस के द्वारा उनके राजनैतिक कद को छोटा करने की रणनीति पर अपना रंज जाहिर करते दिखे और इशारों ही इशारों में राजद के प्रयासों से रैली में उमड़ी भीड़ के दम पर ये बताने की भी कोशिश की बिहार में भाजपा विरोधी कोई भी मुहिम लालू यादव को नजरंदाज कर सफल नहीं हो सकती l

अपने सम्बोधन के दौरान रैली में अच्छी-ख़ासी संख्या में मौजूद अपने यादव समर्थकों को ध्यान में रखते हुए श्री यादव ने कहा कि “यादवों को को जब भैंसिया नहीं पटक सकी तो नरेंद्र मोदी क्या पटकेगा?” उन्होंने यादवों को एकजुट होने का आह्वान भी किया और दोनों हाथ उठाकर अपना समर्थन देने का प्रण लेने को भी कहा l बिहार के बाहुबली विधायक श्री अनंत सिंह की एक यादव युवक की हत्या के सिलसिले में हुई गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए श्री यादव यादव - समुदाय को ये संदेश देते हुए भी दिखे कि यादवों के हितों की रक्षा लालू यादव के अभ्युदय में ही निहित है और यादवों के मान-सम्मान के लिए वो सदैव तत्पर हैं l इस संदर्भ में श्री यादव ने कहा कि “ अनंत सिंह को गिरफ्तार करवा कर नीतीश कुमार ने बहादुरी दिखाई, मोकामा में नाखून नोंच-नोंच कर यादव युवक को  मौत के घाट उतार दिया गया था l”

जहानाबाद सांसद श्री अरुण कुमार के नीतीश जी के छाती तोड़ने वाले विवादास्पद बयान का जिक्र करते हुए श्री यादव ने कहा कि “अरुण ने कहा कि अनंत पर आगे कार्रवाई हुई तो छाती तोड़ देंगे, यह नब्बे के पहले वाला बिहार नहीं है, यह नब्बे के बाद वाला बिहार है और आज नीतीश कुमार के आगे लालू यादव खड़ा है l”

प्याज के बढ़ते हुए दामों पर श्री नरेंद्र मोदी पर उनके ही स्टाइल में चुटकी लेते हुए श्री प्रसाद ने कहा कि “भाइयों व बहनों प्याज का दाम कितना कर दूँ ... चालीस ...पचास....साठ....लो अस्सी कर दिया l”

बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने भी अपने ५० मिनटों के सम्बोधन में मोदी और केंद्र सरकार पर जमकर अपनी भड़ास निकली l श्री कुमार की स्पीच का पिच भी उनके सामान्य पिच से कुछ ज्यादा ही ऊँचा था, उम्मीद से ज्यादा एकत्रित भीड़ से उमड़ा उत्साह शायद इसकी मुख्य वजह थी l

उन्होंने कहा, ''मोदी सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया। आज मन की बात में पीएम ने हार मान ली। जमीन बिल पर सरकार झुक गई है। आज खुशी का दिन है।''

मोदी के डीएनए वाले बयान का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ''मेरा डीएनए वही है, जो बिहार की मिट्टी का है, मेरा डीएनए काम करने वाला है, जुबान चलाने वाला नहीं।''

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा गया की हालिया रैली में बिहार की बिगड़ती हुई कानून–व्यवस्था के संदर्भ में पेश किए गए आँकड़ों को कॉऊंटर करते हुए श्री कुमार ने कहा कि “मैं भारत सरकार के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताता हूँ कि दिल्ली में ५६ इंच वाले के नाक के नीचे अपराध हो रहे हैं, दिल्ली में अपराध का दर है ७६७.४ l बिहार में जनवरी और जून के क्राइम की चर्चा पीएम ने तो कर दी, लेकिन राजस्थान और अपने दूसरे राज्यों का जिक्र नहीं किया l राजस्थान में ४७ फीसदी और मध्य प्रदेश की  ४९ फीसदी की वृद्धि दर पर क्या कहेंगे? एक बात पीएम ने कह दी कि जनवरी की तुलना में जून में क्राइम बढ़ गया। हमने पूरे देश का आँकड़ा देखा। गर्मियों में अपराध ज्यादा होते हैं। पीएम ने ऐसे कहा कि मानो बिहार इस मामले में अनूठा हो ! बिहार का नंबर २२वां आता है। आपके गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली का क्या हाल है? यहाँ किनका शासन है? किसके हाथ में कानून-व्यवस्था है? अब फैसला कर लीजिए, किसके हाथ में जंगल राज है और कहाँ मंगल राज है?”

उन्होंने आगे कहा “बिहार में कोई जंगलराज नहीं है। बिहार का गरीब-गुरबा जग गया है। ये सब (भाजपा वाले) हिटलर और उस गोएबेल्स के अनुयायी हैं, जो मानते हैं कि एक झूठ को बार-बार दोहराओ, सब कुछ सही लगने लगेगा। मैं मुख्यमंत्री हूँ, आरजेडी और कांग्रेस की समर्थन के बदौलत आज हमारी सरकार चल रही है लेकिन आज तक किसी ने यह नहीं कहा कि फलां अपराधी को छोड़ दो।“

हिटलर और गोएबेल्स का उदाहरण नीतीश जी के प्रिय उदाहरणों में से है और पूर्व में भी अनेकों मौकों पर भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए नीतीश जी इसका प्रयोग करते आए हैं l श्री कुमार ने अपने सम्बोधन को आगे और तल्ख बनाते हुए कहा “बिहार में एक युवक की हत्या हो गई, पुलिस ने पूरी तहकीकात कर ली, छानबीन में जिन लोगों के नाम आए, उनको भी पकड़ा। प्रधानमंत्री जी जानिए, ठीक से पता लगा लीजिएगा, जिनकी हत्या हुई और हत्या में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आई है वो आपके ही लोग हैं। जब कानून का पालन किया जाता है तो बीजेपी के ऑफिस में बैठे लोग सीएम की छाती तोड़ देने का एलान करते हैं। जो ऐसा कहते है उसे पीएम बिहार आने के बाद अपना प्रिय मित्र बताते हैं। लालू जी को देखते ही कहते हैं कि जंगलराज आएगा। राष्ट्रीय जनता दल का नामकरण करते हैं, रोजाना जंगलराज का डर , मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि किस आधार पर जंगलराज कहा जा रहा है? हमारे स्वाभिमान को ललकारा है। वो मुझे कहते हैं कि मैं अहंकारी हूँ, मेरे तो रोम-रोम में स्वाभिमान है। मैं तो एक स्वतंत्रता सेनानी के परिवार में पैदा हुआ हूँ लेकिन  हमारे डीएनए को वो लोग चुनौती देते हैं, जिनके परिवार का देश की आजादी में कोई योगदान नहीं है। दुनिया के लोग जब जंगलों में भटक रहे थे तो लोग बिहार में नालंदा में ज्ञान लेने आए थे। आज जो देश के तिरंगे में चक्र है, वो इसी पाटलिपुत्र से निकला था। मेरा डीएनए वही है, जो बिहार की माटी का है। भगवान बुद्ध और महावीर की धरती है बिहार, चाणक्य और आर्यभट्ट की धरती है यह। अब ये कहते हैं कि इसका डीएनए खराब है। हमारा डीएनए इनसे कोई अलग से नहीं है।

जनता से भावनात्मक रूप से जुडने का प्रयास करते हुए श्री कुमार ने आगे कहा “मेरे डीएनए को गड़बड़ कहा, मैं कौन हूँ, मैं आपका हूँ। आज बिहार के लोग अपना नाखून और बाल काटकर डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल इकट्ठा कर रहे हैं। ये सैंपल पीएमओ को भेजा जाएगा। चुनाव से पहले १.२५ लाख करोड़ रुपए का पैकेज का एलान किया, सब पुराना है। रिपैकेजिंग कर रहे हैं। बाद में कह देंगे कि जुमला है। जनधन खाते का खूब ढिंढोरा पीटा जा रहा है। आधे से ज्यादा खाते निष्क्रिय हैं। कहा था, हर गरीब को १५ से २०लाख मिलेगा। अरे १५ से २० हजार ही डलवाकर बोहनी तो करवा देते !”

ये विदित है कि मोदी सरकार की घोषणाओं को जुमला साबित करने पर ही अब तक श्री कुमार का चुनाव-प्रचार केन्द्रित है और इसी कड़ी को और आगे बढ़ाते हुए श्री कुमार ने कहा “मोदी सरकार ने कोई वादा पूरा नहीं किया । मोदी सरकार को जमीन-अधिग्रहण बिल पर झुकना पड़ा है, देश में केवल झूठ बोला जा रहा है। सरकारी कर्मचारियों को भी धोखा दिया। अपने कार्यकाल का एक चौथाई हिस्सा समाप्त कर चुके, एक वादे को नहीं निभाया। कहा था कि नौकरी मिली। एक करोड़ युवाओं को नौकरी मिलेगी। क्या नौकरी मिली? जो वादे किया, वो पूरा नहीं किया। कहा काला धन मिलेगा। कहा कि हर आदमी को ऐसे ही पंद्रह से बीस लाख रुपए मिल जाएंगे। लोगों ने सोचा एक बार फूल पर बटन दबा दो, सारा पैसा ऐसा ही मिल जाएगा। चुनाव के वक्त मोदी जी को बिहार की याद आई है, १४ महीने तक सरकार चलाने के दौरान बिहार  की याद नहीं आई। अब कहने लगे हैं कि बिहार के लोगों ने समर्थन दिया, मोदी जी यहाँ के लोगों ने झांसे में पड़कर आपका समर्थन कर दिया। आज जब हम यहाँ (रैली) के लिए निकल रहे थे तो मोदी जी मन की बात कर रहे थे, भूमि–अधिग्रहण बिल को वापस लेने की बात कर रहे थे, यह उनके मन की बात नहीं, देश की जनता की जीत है। प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा है। यह जो किसान विरोधी भूमि अध्यादेश लाया गया था, तीन-तीन बार जारी किया गया लेकिन संसद में समर्थन नहीं मिला। थककर लोगों के सामने झुकना पड़ा, ये एक बड़ी जीत है, लोकतन्त्र की जीत है । यह बड़ी खुशी का दिन है। आए थे बिहार को ललकारने ! आज घुटने टेकने पड़े। जो कानून पहले लाया गया था, वह प्रगतिशील था। एनडीए के सत्ता में आने के बाद आने इसे कमजोर करने की कोशिश की गई।“

वैसे तो रैली को अनेकों नेताओं जैसे श्री गुलाब नवी आजाद, श्री शिवपाल यादव, श्री शरद यादव, श्रीमती मीरा कुमार, श्री वशिष्ठ नारायण सिंह, श्रीमती राबड़ी देवी, श्री प्रभुनाथ सिंह, श्री अली अनवर, श्री तेजस्वी यादव सरीखे ने भी संबोधित किया, लेकिन फेरहिस्त काफी लंबी होने के कारण यहाँ पर सबका जिक्र करना संभव एवं तर्क व संदर्भ संगत भी नहीं है,रिपोर्ट अनावश्यक रूप से लंबी और उबाऊ हो जाएगी l

आइए अब जिक्र काँग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी जी के सम्बोधन का , हाल के दिनों में सोनिया जी ने शायद ही इतनी बड़ी सभा को संबोधित किया हो ! भीड़ को देखकर उनके चेहरे पर उभरा हुआ संतुष्टि का भाव साफ तौर पर झलक भी रह था और इसका साफ असर उनके भाषण में देखने को भी मिला l ऐसे आत्मविश्वास से लबरेज और इतनी सहजता के साथ श्रीमती गाँधी को बोलते हुए हमने तो कभी नहीं सुना l श्रीमती गाँधी ने अपने सम्बोधन की शुरुआत ही प्रधानमन्त्री श्री मोदी पर निशाना साधते हुए की, उन्होंने कहा, ''कुछ लोगों को बिहार को नीचा दिखाने में काफी मजा आता है l हम धर्म के नाम पर देश को बाँटने का काम नहीं करते हमारा गठबंधन सेक्यूलर मूल्यों पर विश्वास करता है l”

श्रीमती गाँधी ने आगे कहा "पहले पाकिस्तान पर पीएम मोदी खूब बढ़-चढ़ कर भाषण देते थे। आज जब बॉर्डर पर हमारे जवान शहीद हो रहे हैं । हमारे लोग मारे जा रहे हैं तो हम सब जानना चाहते हैं कि उनकी नीति क्या है ? भ्रष्टाचार के मामले चाहे व्यापम हो, मोदी गेट हो, मोदी जी ने इन सब पर मौन साध रखा है। महंगाई बढ़ती जा रही है, रुपए की कीमत बढ़ती जा रही है। आज से दो साल पहले बीजेपी के एक नेता ने कहा था कि रुपए ने अपनी कीमत खोई और पीएम ने अपनी गरिमा खोई। आज मैं पूछना चाहती हूं कि क्या पीएम मोदी ने अपनी गरिमा नहीं खोई? मोदी जी ने हर साल एक करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा किया था, उस वादे का क्या हुआ? नौकरी देना तो दूर की बात है, इन्होंने तो केंद्र की नौकरियों में पाबंदी लगा दी। इन्होंने व्यापमं घोटाले करके लाखों नौजवानों का भविष्य बर्बाद किया है। इन लोगों ने शोर शराबे के अलावा कुछ नहीं किया। मनरेगा में कटौती से भारी संख्या में लोग बेरोजगार हुए हैं। महिलाओं और बच्चों के कल्याण की योजनाओं में भारी कटौती की गई है। गरीबों के हक के लिए हमने संसद में लड़ाई लड़ी और आखिर में सरकार को झुकना पड़ा। मोदी सरकार किसान विरोध सरकार है, जो किसानेां की जमीन छीनकर चंद अमीर दोस्तों को बांटना चाहती है l”

राजनीतिक दृष्टिकोण से अगर समीक्षा की जाए तो यह रैली जेडीयू और आरजेडी दोनों के लिए बेहद अहम है। जहाँ एक तरफ दोनों दल इसे एनडीए और पीएम श्री नरेंद्र मोदी के 'घमंड' का जवाब बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस रैली से ये बिल्कुल ही साफ हो गया कि जेडीयू व श्री नीतीश कुमार डीएनए, बिहार को बीमारू राज्य कहे जाने के मूद्दे को आगे रखकर  बिहार की जनता की भावना को उभारकर वोटों की गोलबंदी का प्रयास करेंगे और जातीय समीकरणों को केंद्र में रखकर मतों की गोलबंदी का जिम्मा राजद व राजद सुप्रीमो श्री लालू प्रसाद यादव के पास होगा l

कल की इस रैली से ये भी स्पष्ट हो गया कि महागठबंधन का पूरा चुनावी अभियान प्रधानमंत्री श्री मोदी, भाजपा नीत सरकार की नीतियों व वादों एवं एनडीए के घटक दलों के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाए जाने के मोड में ही आगे बढ़ेगा l


Alok Kumar, Sr. Journalist, Patna.

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