नयी सरकार से नई उम्मीदें

Typography

जिस अपार बहुमत के साथ जनता ने नीतीश जी के नेतृत्व में एक और नयी सरकार को चुना है उससे स्पष्ट है कि जनता की अपेक्षाएं काफी बड़ी और बढ़ी हैं, उम्मीद है नीतीश जी भी इसे भली–भाँति समझ रहे होंगे l नीतीश जी की अगुवाई वाली सरकार को ये ध्यान रखना होगा कि “जब अपेक्षाएँ बड़ी होती हैं तो अंसन्तोष भी शीघ्र ही उभरता है l”

आजादी के साढ़े छः दशकों के बाद भी प्रदेश की बहुत बड़ी आबादी मूलभूत जरूरतों से वंचित है l प्रदेश में विरोधाभासी व उपरनिष्ठ विकास के सारे तत्व मौजूद हैं l इस लिए नयी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी की शुरुआत कहाँ से की जाए? अपने प्रदेशव्यापी चुनावी अभियान एवम चुनावों परिणामों के उपरांत अपने संबोधनों में नीतीश जी और महागठबंधन के सबसे बड़े घटक दल के नेता लालू प्रसाद जी गाँवों और गरीबों से जुड़ने की बातें करते दिखे हैं जिससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि नयी सरकार की प्राथमिकता गाँवों व ग्रामीणों के हालात को दुरुस्त करने की हो सकती है l

नयी सरकार के गठन के बाद मैंने बिहार के कुछ जिलों, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पटना, शेखपुरा, जमुई, नालंदा, जहानाबाद, अरवल, और गया की ग्रामीण व शहरी जनता से सीधा संवाद किया और उनके विचारों और सुझावों को आप के समक्ष इस आलेख के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हूँ l

जनता के विचार में सबसे जरूरी है कि अपने शुरुआती दौर में नयी सरकार मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ योजनाओं और नीतियों का समुचित कार्यान्वयन ग्रामीण क्षेत्रों में करने की दिशा में सार्थक पहल करे l वैसे तो प्रदेश की जनता की, विशेषकर ग्रामीण जनता की, असंख्य समस्याएँ हैं, अनेकों मुद्दों हैं लेकिन अगर रोज़मर्रा की जरूरतों को जनता के पास पहुँचाने में नयी सरकार सफल हो पाती है तो बाकी अन्य समस्याओं का निदान करना स्वतः ही सरल हो जाएगा l

जनता की सबसे अहम जरूरत भोजन है जिसके लिए जरूरी है कि खाद्यान वस्तुओं के दाम न बढें l इसके मुख्य कारणों में से कृषि के क्षेत्र की धीमी विकास गति तथा कृषि का मानसून पर निर्भर होना है l द्रष्टव्य है कि अब तक के सुधारों का इस क्षेत्र को कोई बहुत बड़ा लाभ नहीं मिला है l गेंहू तथा चावल की पिछले दो दशकों की उत्पादन दर तो पहले के दशकों से भी कम है l जब प्रदेश में ही प्रतिष्ठित शोध-संस्थान उपलब्ध हैं तो कृषि–क्षेत्र के सुधारों जैसे उन्नत बीज की उपल्ब्धता एवं अन्य तकनीकों को बाजार के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए l बेहतर बीज की उपल्ब्धता नहीं है और इसके कारण उत्पादन पिछले कई दशकों से प्रभावित होता आया है l रूपए के गिरने से भी खाद्यानों के दामों में तेज़ी आती है l सिंचाई परियोजनाओं को बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है l भू-जल के अंधा–धुंध दोहन को उचित कानून को प्रभावी तरीके से लागू कर रोकने की आवश्यकता है l

बिहार की जागरूक जनता का साफ तौर पर ये मानना है कि “सरकारी योजनाएं और नीतियाँ जब तक जनता की बुनियादी जरूरतों से नहीं जुड़ेंगी तब तक विकास की सार्थकता पर सवालिया निशान खड़े होते ही रहेंगे l शासन को सर्वहितकारी बनाने के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जो सहज हो, उसमें प्रशासनिक जटिलताएँ कम हों और संसाधनों का समुचित सदुपयोग हो l आजादी के अड़सठ सालों बाद भी आज हमारे प्रदेश में अगर लोगों की भोजन, आवास, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पाई हैं तो फिर ऐसे में सिर्फ सत्ता की राजनीति के लिए विकास और सुशासन की बातें करना स्वत: ही लोकतान्त्रिक–व्यवस्था की सार्थकता पर प्रश्न-चिन्ह खड़े करता है l”

नई सरकार के समर्थकों और नुमाइंदों को ‘न्याय के साथ विकास / समग्र विकास’ के नारे पर इतराने से परहेज कर यह सुनिश्चित करना होगा कि हर किसी को मूलभूत सुविधाएं कैसे मुहैया कराई जाएँ l विकास हमेशा भविष्योन्मुखी होता है और उसे हासिल करने के लिए विकास की अवधारणा में जनता की आवाज को समाहित करने की जरूरत है l आज सबसे बड़ी चुनौती जनता के हित में बनी नीतियों को जनता के लिए सुलभ कराने की है l किसी भी स्वस्थ-व्यवस्था के लिए यह बेहद जरूरी है कि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो और आम आदमी की सत्ता और सरकार में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी हो l बड़ी व महात्वाकांक्षी योजनाओं की लोक-लुभावन घोषणाओं को प्रभावी क्रियान्वयन का अमली–जामा पहना कर ही शासन अपनी महत्ता और सार्थकता सिद्ध कर सकता है l जिस तरह से सरकारी योजनाओं की आड़ में अब तक आम आदमी को उसकी जरूरतों से मरहूम रख कर लूटा-खसोटा गया है, वैसे में इस नई सरकार से जनता की उम्मीदें और आकांक्षाएँ काफी बड़ी और बढ़ी हैं l आंकड़ों की बाजीगरी से आम जनता का हित नहीं सधता और ऐसा करने वालों को जनता नकारती भी आई है l जनता के विचार में अधिसंख्य आबादी के जीवन स्तर में सुधार ही विकास का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है और नई सरकार की प्राथमिकताओं में ये सर्वोपरि होनी चाहिए l

मौजूदा दौर में अगर “बहुप्रचारित विकसित बिहार” की बात करें तो लंबी-चौड़ी सड़कों, अपार्टमेन्टस एवं मॉल्स के निर्माण और विकास दर (आंकड़ों की बाजीगरी) के बढ़ने को ही विकास बताया जा रहा है। सबसे घातक तो यह है कि सत्ता के द्वारा भी इसी अवधारणा को सच और सही बताया जाता रहा है । मीडिया का एक बहुत बड़ा वर्ग भी अपनी व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं को लोकहित से ऊपर रखकर एवं अपने मूल उद्देश्य से भटककर उनके साथ है।

बिहार के संदर्भ में विकास के साथ कुछ बुनियादी शर्तें जुड़ी हैं। यहाँ वास्तविक विकास कार्य उसी को कहा जा सकता है जिसमें अंतिम व्यक्ति का हित सर्वोपरि रहे, जबकि आज जो बिहार में हो रहा है या पिछले दस सालों में जो हुआ है वो इसके ठीक उल्ट है। जो नीतियां बनाई गईं उनमें उनमें आम आदमी की बजाए सिर्फ राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों, पूंजीपतियों एवं प्रभावशाली समूहों (जो चुनावी राजनीति में अहम भूमिका अदा करते हैं) के हितों का ध्यान रखा गया । नीतियों का वास्तविक क्रियान्वयन नगण्य ही रहा ।

हम में से अधिकांश लोग जब विकास की बातें करते हैं तो प्रायः हम विकास की पाश्चात्य अवधारणा का ही अनुसरण करने लगते हैं। हम भूल जाते हैं कि स्वतंत्रता के बाद से पहली सरकार के गठन के साथ ही विकास के संदर्भ में बिहार की भी अपनी एक सोच रही है। बिहार ही क्या, देश के प्रत्येक कोने में विकास की व्याख्या अलग-अलग ढंग से की गई है। जिस समाज में सत्ता और जनता के बीच का सामंजस्य बरकरार रहता है, वहीं सही विकास होता है। विकास की अवधारणा वस्तुतः जनता से जुड़ी हुई है। जनता (आम) का जीवन-स्तर कैसा है? इसी से तय होता है कि विकास हुआ या नहीं। वास्तविक विकास एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें जमीन, जल, जंगल, जानवर जन का परस्पर पोषण होता रहे। वही स्वरूप सही माना जाता है जो आर्थिक पक्ष के साथ सामाजिक और व्यावहारिक पहलूओं का भी ध्यान रख सके।

सत्ता व शासक को ये सदैव ज्ञात होना चाहिए कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बसने वाले समूहों के रहन-सहन, खान-पान, उनकी राजनीति,संस्कृति, उनके सोचने और काम करने के तौर-तरीके, सब जिस “मूल तत्व“ से प्रभावित होते हैं, वह है वहाँ की भौगोलिक परिस्थिति। उसी के आलोक में वहां जीवन-दृष्टि, जीवन-लक्ष्य, जीवन-आदर्श, जीवन-मूल्य, जीवन-शैली विकसित होती है। उसी के प्रभाव में वहां के लोगों की समझ बनती है और साथ ही उनकी सामाजिक भूमिका भी तय होती है। बिहार में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लेकर आज तक विकास की किसी भी अवधारणा को “मूल तत्व“ को ध्यान में रखकर मूर्त रूप नहीं दिया गया। वर्तमान का बहुप्रचारित विकास का ‘बिहार मॉडल’ भी “मूल तत्व“ से कोसों दूर है। विकास की अवधारणा में जब भी राजनीति जटिलताएं समाहित रहेंगी तो विकास सम्भव ही नहीं है अपितु ऊपरनिष्ठ विकास का दिखवा और छलावा मात्र होगा।

विभिन्न भौगालिक परिस्थितियों की समझ के साथ विकास के प्रारूप के निर्माण, समस्याओं के समाधान, सत्ता की पारदर्शिता और विकेन्द्रीकरण के बिना सम्यक विकास सम्भव ही नहीं है। भौगोलिक दशा और दिशा को ध्यान में रखकर विकास के विविध प्रारूपों के नियोजन और क्रियान्वयन से ही समग्र विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। विकास के एक कॉमन मॉडल से सिर्फ़ विसंगतियां और विरोधाभास उत्पन्न होंगे। मसलन उत्तरी बिहार की भौगोलिक स्थिति दक्षिणी बिहार के ठीक विपरीत है, प्राकृतिक संरचनाएं व संसाधन भिन्न हैं, भौतिक व मानवीय संसाधन भिन्न हैं तो प्रारूप भी भिन्न होना चाहिए।

विगत एक दशक में बिहार में जिस प्रकार से विकास के आंकड़ों की आड़ में राजनीतिक हितों की पूर्ति का खेल खेला गया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है और इस परिस्थिति को बदलने की जिम्मेवारी ही अपार बहुमत के साथ जनता ने नई सरकार को सौंपी है l अगर नई सरकार इस बदलाव को लाने में विफल होती है तो शासन-प्रणाली की विश्वसनीयता पर ही सवालिया निशान लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता l


Alok Kumar, Sr. Journalist, Patna.

 

BLOG COMMENTS POWERED BY DISQUS

More News...

Financial Handler of Misa Bharti Arrested in Unrelated Money Laundering Case

May 23, 2017
File photo of Lalu's daughter Misa Bharti.
New Delhi: The Enforcement Directorate (ED) on late Monday evening arrested Rajesh…

Sushil Modi now to Target Other Corrupt RJD Leaders

May 23, 2017
BJP leader Sushil Kumar Modi holding a press conference in Patna on Tuesday.
Patna: Bharatiya Janata Party (BJP) leader Sushil Kumar Modi, at a press conference in…

Another Fire in Building Next to the GV Mall

May 23, 2017
Fire in Soni Building in Patna on Tuesday.
Patna: Less than a week after a massive fire destroyed most of the GV Mall on Boring Road…

Shatrughan Sinha, Sushil Modi Twitter War Gets Uglier

May 22, 2017
File photo of BJP leaders Shatrughan Sinha and Sushil Kumar Modi.
Patna: Bharatiya Janata Party (BJP) MP from Patna Saheb and former actor Shatrughan…

Pappu Yadav Continues to Advocate Killing of Corrupt Politicians, Babus

May 22, 2017
Pappu Yadav holding a press meet in Patna on Monday.
Patna: Jan Adhikar Party (JAP) leader and Madhepura MP Pappu Yadav, continuing his…

Patna High Court Gets Six New Judges; 18 Posts Still Vacant

May 22, 2017
The newly-appointed judges of Patna High Court.
Patna: Patna High Court Chief Justice, at a simple ceremony at the Marble Hall on Monday…

PhotoGallery

photogallery module

Your Favorite Recipes on PD

Recipes

Latest Comments

Recent Articles in Readers Write, Lifestyle, Feature, and Blog Sections