कानून केवल जनता के लिए ही नहीं अपितु राजा के लिए भी होने चाहिएं

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नीतीश कुमार जी, राज्य द्वारा बनाये गए कानून और विधान केवल जनता के लिए ही नहीं अपितु राजा के लिए भी होने चाहिएं..

बिहार के गोपालगंज में जहरीली शराब से हुई १३ मौतों और शराबबंदी लागू किए जाने से लेकर अब तक हुई ३० मौतों ने नीतीश जी और उनकी सरकार के तमाम वैसे दावों की पोल खोल कर रख दी है जिसमें अब तक ये दावा किया जाता रहा है कि बिहार में शराबबंदी प्रभावी रूप से लागू है.

गोपालगंज की घटना में हुई मौतों की वजह कुछ और बताने-दिखाने की प्रशासन की पर्दा डालने की कवायद पर से अब पर्दा उठ चुका है और बिहार की जनता का मुख्यमंत्री जी से सीधा सवाल है किये कैसा जनकल्याण है ?

स्थानीय लोगों की मानें तो शराब एक अर्से बिक रही थी और लोग बेधड़क इसका सेवन भी कर रहे थे. मुख्यमंत्री महोदय क्या ये बता पाएंगे कि कड़ाई, सजग एवं चौकस व् मुस्तैद प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद ये कैसे संभव हो पा रहा था ?

इन मौतों के लिए तो सीधे तौर पर प्रशासनिक अमला जिम्मेवार है तो क्या इस के लिए जिम्मेवार अफसरानों पर कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री आजीवन कारावास या सजा-ए-मौत की अनुशंसा करेंगे ?

देखा जाए तो सीधे तौर पर नैतिक जिम्मेवारी मुख्यमंत्रीजी की ही बनती है और जिस प्रकार से मुख्यमंत्री जी सदैव सामूहिक जिम्मेदारी की बात करते हैं ऐसे में तो मुख्यमंत्री महोदय को खुद पर भी कार्रवाई करने की अनुशंसा करते हुए अपना त्यागपत्र माननीय राज्यपाल महोदय को सौंप देना चाहिए.

मुख्यमंत्री जी, शुक्र नीति के अनुसार राजा ही कालका कारण होता है... सत् और असत् गुणों का प्रवर्तक राजा ही होता है.... राजा ही प्रजा को धर्म में प्रतिष्ठित करता है..... भारतीय नीति एवं राजधर्म में राजा का आचरण ही आदर्श राज्य का आधार होता है.... राजा चाहे व्यक्ति हो या दल वो अपने व्यवहार, खुद की जिम्मेदारियां तय कर के ही अपनी प्रजा या समाज का उन्नायक बनता है.... तुलसीदास के अनुसार सुशासन के मानक राम राज्य में 'मर्यादा पुरुषोत्तमश्रुतिपालक धर्मधुरन्धर राम' ने सिर्फ विधान नहीं बनाया, किंतु आदर्श आचरण उपस्थित किया ....राजा उतना शासक नहीं होता था, जितना प्रजा के हित का परामर्शदाता...श्रीराम प्रजा को आत्मीयता की दृष्टि से उपदेश करते थे, राजा के रुआब में नहीं...वहाँ राजा करे सो न्यायका कोई स्थान नहीं था...

मुख्यमंत्री जी ....राज्य द्वारा बनाये गये कानून और विधान केवल जनता के लिए ही नहीं अपितु, राजा के लिए भी होने चाहिएं... राम का आचरण इसका प्रमाण माना गया है....


Alok Kumar, Sr. Journalist, Patna

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