उड़ते अरमानों की ताबूत में अंतिम कील ठोकने के मूड में है संघ

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बिहार में भाजपा की हार की पटकथा का क्लाईमेक्स बिहार में आरक्षण के खिलाफ संघ-प्रमुख मोहन भागवत का दिया गया बयान थायूपी चुनाव के ऐन पहले आज एक बार फिर से वही क्लाईमेक्स दुहराया संघ नेसिर्फ किरदार और मंच बदल दियामोहन भागवत की जगह मनमोहन वैद्य और बिहार की जगह जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल l

मैं काफी दिनों से कह रहा हूँ "संघ यूपी में अति-महत्वाकांक्षी जोड़ी (मोदी-शाह) के उड़ते अरमानों की ताबूत में अंतिम कील ठोकने के मूड में है l" संघ खुद के (संगठन के) कद से बढ़ने की चाहत रखने वालों की लंबाई पहले भी छांटता रहा है l

RSSRSSवैद्य के इस इस बहुचर्चित व् विवादित बयान के पश्चात् एक वरिष्ठ संघी ने संवाद के दौरान मुझ से कहा कि "मैं (संघ) ही 'हीरोबनाता हूँ और मैं ही 'जीरोभीमैं एक बार फिर दुहराऊँगा 'मुगालते में रहने वालोंको संघ अक्सर बताता आया है कि मैं’ ही असली 'हीरोहूँ... ‘मुझ’ से बड़ा बनने व् दिखने की हसरत पालने वालों को 'जीरोकैसे बनाया जाता है येमैं’ बखूबी जानता हूँ... फर्श से अर्श तक ले जाने का फार्मूला भी ‘मेरे’ ही पास है और अर्श से फर्श तक लाने की विधा भीमेरे’ ही पास... कुलाँचे भरना ‘मैं’ ही सिखाता हूँ और फिनिशिंग लाईन के ठीक पहले जटिल बाधा खड़ी कर पंगु भी ‘मैंही बनाता हूँ l"

वैद्य  के द्वारा एक ऐसे मंच 'जयपुर लिटरेचर फेटिवलसेजिस पर पूरी दुनिया की निगाह रहती हैआरक्षण-विरोधी बयान दिलवा कर यूपी में एडिशनल वोट्स पाने के भाजपा (मोदी-शाह) के मंसूबों पर संघ ने एक बार फिर से पानी फेर दिया है l 

गौरतलब है कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल संघ व् भाजपा की नीतियों व् विचारधारा के विरोधियों की अभिव्यक्ति के मंच के रूप में जाना जाता है और इस फोरम  में  अपने दो वरिष्ठतम विचारकों व् अधिकारियों श्री मनमोहन वैद्य एवं श्री दत्तात्रेय होसबले को जगह दिला कर चुनावों के सन्दर्भ में सबसे संवेदनशील मुद्दे आरक्षण का विरोध करवाने के पीछे संघ की मंशा साफ़ है "भाजपा को यूपी के दंगल में डिफेंसिव-मोड में ला कर मोदी-शाह की जोड़ी को चित्त करना l"

एक बात तो अब बिल्कुल तय ही है कि अपने प्रचार-अभियान में मोदी-शाह की जोड़ीभाजपा का प्रचार तंत्र और उनकी पूरी टीम अब पूरी तरह से डिफेंसिव-मोड में ही रहेगी , विरोधियों पर आक्रामक तेवर के साथ प्रहार करने की बजाए  इनका अभियान अब सिर्फ और सिर्फ सफाई देने पर तक ही सीमित होगा और पूरी ऊर्जा इस मुद्दे को पुरजोर भुनाने की विपक्ष की कोशिशों को काउंटर करने में ही व्यर्थ जाया होगी l

संघ का संगठन व् उसके स्वयंसेवक ही इसकी राजनीतिक इकाई (भाजपाके आँख-नाक-कान होते हैं और इनके माध्यम से संघ ये बखूबी जानता है कि यूपी में भाजपा के सवर्ण वोट-बैंक में भी बिखराव हैब्राह्मणों-राजपूतों के बीच जारी वर्चस्व व् दावेदारी के द्वंद से भाजपा पहले ही हलकान है l ऐसे में आरक्षण हटाने की बात कर पिछड़ी जातियों को भाजपा से दूर करने व् अम्बेदकर की नीतियों की गलत व्याख्या कर दलितों को भी भाजपा से परहेज करवाने का अपना मास्टर-स्ट्रोक संघ ने ऐन मौके पर खेल दिया l मोदी-शाह की जोड़ी को नाधने व् साधने का इससे बेहतर व् अचूक शस्त्र संघ के लिए कोई और हो भी नहीं सकता था l


Alok Kumar,
Senior Journalist & Analyst

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