'कुबेर का खजाना' कहाँ से मिला सुशील मोदी जी के परिवार को?

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सवाल सच में बड़ा अहम है कि "अपने विरोधियों पर भ्रष्टाचार के बिना तथ्यों के आरोपों की बौछार करने वाले छोटे मोदी के नाम से जाने वाले सुशील मोदी जी का परिवार अकूत संपत्ति का मालिक कैसे बन बैठा?"  

'हिट और रन' सुशील मोदी जी की पुरानी फितरत रही है और अब जब राजद ने गंभीर आरोपों के साथ पलटवार किया है तो क्या शुचिता और खुद के पाकसाफ होने की दुहाई देने वाले सुशील मोदी जी अपने परिवार के खिलाफ भी निष्पक्ष जाँच की मांग केंद्र या राज्य सरकार से करेंगे?

लालू यादव के परिवार पर सुशील मोदी जी के द्वारा लगाए गए आरोपों के सन्दर्भ में सुशील मोदी जी के ट्रैक-रिकॉर्ड को देखते हुए ही बात की जाए तो अगर श्री मोदी के पास यादव परिवार के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य या नियमों के उल्लंघन की तथ्यात्मक जानकारी होती तो क्या श्री मोदी अदालत का दरवाजा खट-खटाने से चूकते? श्री मोदी के द्वारा लालू यादव व्  उनके परिवार पर लगाए गए आरोपों के सिलसिले पर गौर करने के पश्चात प्रथम-द्रष्टया जो बात उभर कर समझ में आती है वो ये है कि श्री सुशील मोदी का निहित उद्देश्य महज सनसनी पैदा कर लालू यादव व् उनके दोनों मंत्री-पुत्रों को बैक-फुट पर धकेल कर अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपनी गिरती हुई साख क़ी  मरम्मती करनी थी।

लेकिन अब जब राजद ने कड़े तेवर व् गंभीर आरोपों के साथ पलटवार किया है तो पब्लिक-डोमेन में खुद को पाकसाफ़ साबित करने क़ी बारी श्री मोदी क़ी है, श्री मोदी के लिए राजद का पलटवार अप्रत्याशित तो होगा लेकिन अब जबाब देने क़ी बारी व् जिम्मेवारी तो बनती ही है। आरोप गंभीर हैं और सुशील मोदी के नजदीकी रिश्तेदारों के व्यावसायिक हितों में पिछले एक दशक  में हुए उछाल को देखते हुए राजद द्वारा लगाए आरोपों पर यकीन न करने की कोई बड़ी गुंजाईश भी नहीं बनती। कपड़ों के खुदरा कारोबार से शरुआत कर रेडीमेड परिधानों के थोक कारोबार तक का सफर तो समझ में आता है लेकिन सैंकड़ों कंपनियों का गठन और उनमें अकूत निवेश समझ से परे है 'कुबेर का खजाना' कहाँ से मिला मोदी जी के परिवार को ? बिहार की जनता जानना तो जरूर चाहेगी

मनी-लॉन्ड्रिंग के लिए देश भर में  कुख्यात ललित कुमार छावछरिया के साथ श्री सुशील मोदी जी के भाईयों का साझा व्यापार गंभीर मामला है और प्रवर्तन निदेशालय को इस पर त्वरित संज्ञान लेते कार्रवाई करनी चाहिए। मनी-लॉन्ड्रिंग देश-द्रोह है और अब बारी श्री सुशील मोदी जी की है कि वो ये साबित करें कि उनके नजदीकी रिश्तेदार देश-द्रोह में शामिल नहीं हैं।


Alok Kumar,
Senior Journalist & Analyst

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