चुनावी-पोस्टमार्ट्म: मेरा नजरिया

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भारतीय जनता पार्टी ने एक स्पष्ट एजेंडे के साथ चुनाव में जाने का फैसला कियामोदी के नेतृत्व में और मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करयहाँ काँग्रेस वाली भ्रम की स्थिति नहीं थी भाजपा ने अपना एक प्रधानमंत्री का उम्मीदवार जनता के समक्ष रखा और उस के नाम पर जनता से बहुमत की गुजारिश की और अगर मोदी के नाम पर भाजपा की सरकार बनती है तो मोदी जनता के द्वारा चुने हुए प्रधानमंत्री साबित होंगे ना कि हाई कमान के द्वारा थोपे हुए प्रधानमंत्री l

काँग्रेस तो राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के तौरपर पेश करने का साहस भी नहीं जुटा पायी (निश्चित ही जीत की स्थिति में राहुल कोथोप दिया जाता) और यहीं रणनीति के फ्रंट पर भाजपा से उसकी पहली हार हुई l

सरकार बनने की स्थिति में भारतीय जनता पार्टी और उसके घटक दल बेहिचक सीना ठोक के कह सकतेहैं कि यही "Referendum" है ....

चुनावी-पोस्टमार्ट्म": मेरा नजरिया (२): २०१४के चुनाव में मतदान के ट्रेंड को विश्लेष्णात्मक दृष्टि से देखा जाए तो मतदान केसमय तक जनता का आक्रोश केंद्र की नीतियोंतुष्टीकरणभ्रष्टाचारमहँगाईइत्यादि के कारण चरम पर था और इस आक्रोश को सकारात्मक तरीके से अपने पक्ष मेंभुनाने का काम नरेंद्र मोदी ने जनता के साथ एक संवाद कायम कर बखूबी किया lजाति औरधर्म पर आधारित मतों के अपने पक्ष में ध्रुवीकरण में भी मोदी और उनके रणनीतिकारअपने विरोधियों पर भारी पड़ेइस के लिए उत्तरप्रदेश का उदाहरण सबसे सटीक हैपश्चिमी उत्तरप्रदेश में टीम मोदी ने मुजफ्फरनगर दंगों की पृष्ठभूमि में धर्म कीराजनीति को आधार बनाकर मतों की गोलबंदी अपने विरोधियों की तुलना में बेहतर तरीके सेकी और पूर्वी उत्तरप्रदेश के जातिगत समीकरणों को भी प्रभावी तरीके से अपने पक्ष मेंभुनाया l

विरोधियों के एडवांटेज को अपने एडवांटेज के रूप में तब्दील कर लेनाचुनावों में सफलता की गारंटी है और इस बार के चुनावों में मोदी और उनकी टीम ने इसेबखूबी अंजाम दिया l

चुनावी-पोस्टमार्ट्म": मेरा नजरिया (३): एक्जिट -पोल केनतीजों की अगर मानें तो ऐसा प्रतीत होता है कि "सम्पन्न चुनावों के दौरान जिस तरहसे मोदी विरोध का "डबल -ट्रिपल डोज़" जनता को पिला कर भरमाने की कोशिश की गयी वहीउल्टा पड़ गया इसके प्रणेताओं पर लोकतन्त्र का अजीबो-गरीब 'दिवालिया-स्वरूप उभरकर आया इस दौरान जहाँ राजनीति का एक बड़ा तबका लोकहित में मुद्दों पर आधारित बहससे खुद को अलग कर और एक व्यक्ति-केन्द्रित विरोध में लिप्त हो कर सिर्फ और सिर्फदेश की जनता की आँखों में धूल झोंकने का काम करता दिखा 

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