भाजपाई खुद अपना माखौल उड़वा रहे हैं

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बिहार के उप-चुनावों के नतीजों के बाद सोशल मीडिया व मीडिया के अन्य माध्यमों पर हार को स्वीकारने और उसकी समीक्षा करने की बजाए सच्चाई से मुँह मोड़ते हुए भाजपा के चन्द नेतागण व समर्थक ये कहते हुए लगातार देखे जा रहे हैं कि भाजपा ने अकेले दम पर लालू-नीतीश-काँग्रेस गठबंधन का मुक़ाबला किया और चार सीटें हासिल कीं l”

 ये विरोधाभासी व हास्यास्पद है और स्वतः हीएनडीए गठबंधन पर ही सवाल खड़े करता हैl ऐसा कहने वालों से मेरा सीधा सवाल है किक्या इन उपचुनावों में घटक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने अपनी कोई भूमिका नहींनिभाई ? क्या बिहार में एनडीए का गठबंधन केवल लोकसभा चुनावों तक ही सीमित व सक्रियथा? और अगर सही में ऐसा है तो क्या भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को गठबंधन कीप्रासंगिकता पर फिर से पुनर्विचार करने की आवश्यकता नहीं है?” 

ज्ञातव्य है किबिहार में भाजपा के साथ लोजपा और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का गठबंधन है और लोजपाने तो परबत्ता सीट से अपना उम्मीदवार भी खड़ा किया था, जिसकी एक बहुत ही बड़े अंतरसे हार भी हुई है l ये भी सबों की जानकारी में है कि उपचुनावों के दौरान राष्ट्रीयलोक समता पार्टी की ओर से उसके प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार (जहानाबाद सांसद ) नेसघन जन-संपर्क व प्रचार अभियान चलाया था l परिणामों के बाद डॉ. अरुण कुमार कासंतुलित व परिपक्व बयान भी आया था, जिसमें जनता के निर्णय को स्वीकारते हुएउन्होंने हार के कारणों की समीक्षा की बात कही थी और कहा था कि बिहार विधान सभा केउपचुनाव के नतीजे एनडीए के खिलाफ गये हैं तो यह एनडीए नेताओं के फीलगुड में जाने कापरिणाम भी है। चुनाव प्रचार के दौरान तीनों पार्टियों के बीच समन्वय का अभाव औरउदासीनता भी दिखी l”

बावजूद इसके भाजपा द्वारा अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दम्भ भरनाऔर प्रतिकूल परिणामों के पश्चात अपने आप को शहीदोंकी माफिक प्रस्तुत करने कीनीति से भाजपाई खुद अपना माखौल उड़वा रहे हैं l

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