ज्यादा जोगी मठ उजाड़न

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बिहार भाजपा की प्रदेश इकाई कैसे अंतर्विरोधोंअंतर्कलह व गुटबाजी से जूझ रही हैइसका जिक्र मैं लोकसभा चुनावों के पहले से अपने आलेखों व विश्लेषणों में करता आरहा हूँ लोकसभा चुनावों तक को नमो के नाम पर किसी तरह से इस आश्वासन के साथ इस परपर्दा डाला गया कि चुनावों के बाद हल अवश्य ही ढूँढा जाएगा लेकिन स्थिति यथावत हीरही और जिसका खामियाजा १० सीटों वाले उपचुनाव में पार्टी को भुगतना भी पड़ा l

 

उपचुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के नेताओं की बयानबाजी एवं आरोपों-प्रत्यारोपों कादौर पुनः अपने परवान पर हैl सच्चाई तो ये है कि आज भाजपा में कोई शीर्ष नेता एकसुर में बात करता हुआ नहीं दिखता है, सब के सब अपनी डफली के साथ अपना राग अलाप रहेहैं, कोई किसी की सरपरस्ती मनाने को तैयार नहीं है, सब के अपने-अपने स्वहित केएजेंडे हैं, कोई पार्टी, संगठन व कार्यर्ताओं की परवाह करता हुआ नहीं दिखता है l

मैं भाजपा की गतिविधियों पर एक अर्से से नजदीकी नजर रखता आया हूँ और आज की तारीखमें मुझे ये कहने में तनिक भी संकोच नहीं है कि भाजपा की प्रदेश इकाई में जितने गुटहैं उतने बिहार के किसी भी राजनीतिक दल में नहीं हैं l भाजपा की धूर विरोधी पार्टीजेडी (यू) की ही बात की जाए तो वहाँ भी तीन ही गुट स्पष्ट तौर पे दिखते हैं एक मुखरनीतीश विरोधी गुट, एक शरद यादव का गुट जिसमें मुख्यमंत्री श्री जीतन राम मांझी जीभी बड़े शातिराना अंदाज में शिरकत करते हुए दिखते हैं, और नीतीश की अगुआई में उनकेसमर्थकों का एक गुट लेकिन भाजपा की प्रदेश इकाई गुटों की संख्या के मामले में सबोंको मात देती दिखती है l

सुशील मोदी का गुट, अश्विनी चौबे का गुट, नंदकिशोर यादवका गुट, शाहनवाज़ हुसैन का गुट (गुटबाजी की मंडली में सबसे नई प्रविष्टि है ),सी.पी. ठाकुर का गुट;सी.पी. ठाकुर के अलावा भूमिहारों के दो अलग गुट जिसमें एकगुट की कमान गिरिराज सिंह के हाथों में है; राजपूतों के तीन गुट (गोपाल नारायणसिंह, राधा मोहन सिंह, राजीव प्रताप सिंह रूड़ी), वैश्यों का सुशील मोदी के इतरएक गुट जिसमें चाणक्य की भूमिका में गंगा प्रसाद जी रहते हैं, ब्राह्मणों का एकअलग गुट (मंगल पांडे और अश्विनी चौबे के इतर), पुराने जनसंघियों का एक गुट, रामेश्वर चौरसिया का गुट, प्रेम कुमार का गुट ...वगैरह - वगैरह ...

अगर सारे गुटोंके नामों की चर्चा यहाँ पर की जाए तो उबाऊ हो जाएगा l ऐसा भी नहीं है कि भाजपा काकेंद्रीय नेतृत्व इस गुटबाजी से अनभिज्ञ है लेकिन किन कारणों से इस दिशा में कोईकारवाई नहीं होती दिखती है ये बेहतर भाजपा हाई-कमाण्ड ही बता सकता है, लेकिन मेरामानना है कि जीत की खुमारी अभी भी भाजपा पर हावी है और उसके 'फील-गुड' अनुभव सेबाहर निकलने को अभी कोई तैयार नहीं है l आसन्न विधान-सभा चुनावों के पहले समय रहतेअगर भाजपाई नहीं चेते तो "ज्यादा जोगी मठ उजाड़न" वाली कहावत चरित्रार्थ होने की हीप्रबल सम्भावना है  जिसका 'ट्रेलर' लोगों को उपचुनावों में देखने को मिल चुका है l

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