Friends’ Words of Caution from Bihar

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Below are the unedited excerpts from the Facebook pages of two abiding friends since our JNU years in the 80’s. Kumar Narendra Singh and Ranjan Sharma are originally from Bihar and now settled down in their professional lives in New Delhi. We may not agree on everything but we have a lot of respect for each other’s views. Anxieties and concerns of friends like them should mean a lot to us. We are away from Bihar but Bihar is always within us.

Commenting on the education system in Bihar a few weeks ago, Narendra Singh, a senior journalist, posted:

इसमें कोई शक नहीं कि नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की राह पर आगे बढ़ाया। उनकी अनेक उपलब्धियां गिनाई जा सकती हैं, लेकिन उनके मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार की शिक्षा रसातल में पहुंच चुकी है। आज बिहार के स्कूलों में पढ़ाई होती ही नहीं। दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री को इसकी कोई परवाह नहीं है। स्कूल ही नहीं, कॉलेजों में भी क्लासेज नहीं होते। पटना कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान तक में कक्षाएं नहीं लगतीं और जैक्सन, मिन्टो जैसे हास्टलों में गुंडे रहते हैं। ऐसी बात भी नहीं है कि मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्हें इसकी कतई कोई चिंता नहीं है। कभी बिहार की प्राथमिक शिक्षा देश की सर्वोत्तम प्रथमिक शिक्षा मानी जाती थी, लेकिन आज इन स्कूलों में केवल दलितों के बच्चे पढ़ने जाते हैं और वह भी इसलिए कि वहां उन्हें दोपहर का भोजन मिल जाता है। आखिर यह कैसी पढ़ाई है, जहां का टॉपर अपने विषय तक नहीं बता पाता। नकल रोकिए, नीतीश जी। केदार पांडेय ने अपने समय में नकल रोक कर दिखा दिया था। क्या फर्क पड़ता है यदि बिहार बोर्ड का रिजल्ट 20 प्रतिशत भी होता है। नीतीश जी, क्या शिक्षा को मिटाकर बिहार को आगे ले जाया जा सकता है। आपसे हमें काफी उम्मीद है। हम आशा करते हैं कि बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए आप आवश्यक कदम जरूर उठाएंगे। शिक्षा का स्तर सुधारने में यदि आप असफल होते हैं, तो बिहार आपको कभी माफ नहीं करेगा।

On August 6, 2016, Ranjan Sharma commented on the so called pilgrimage to a religious place:

सावन के महीने में कांवरियों का आतंक अब असहनीय होते जा रहा है ! श्रद्धालुओं के अलावे हर छोटे बड़े इलाके के सारे आवारा किस्म के बेरोजगार युवा इस महीने जबरन चंदा उगाही कर भाड़े की ट्रक और बड़े-बड़े ऑडियो स्पीकर के साथ इस अभियान पर निकलते हैं और सारे रास्ते तेज़ ऑडियो पर फूहड़ गाने बजाते हुए अक्सर ट्राफिक जाम का कारण बनते हैं ! रास्ते में जगह-जगह मुफ्त खाने-पीने की सुविधा विभिन्न शिविरों में मिलता ही रहता है ! साथ ही ये इस यात्रा पर उगाही किये चंदों से दारू, चरस, गांजा, भांग का भी धडल्ले से सेवन करते चलते हैं ! अगर रास्ते में कोई उनकी ज्यादती के खिलाफ आवाज़ उठाता है तो ये सब मिल कर उनके खिलाफ हिंसा पर भी उतारू रहते हैं ! ये लोग हिन्दू धर्म की किस प्रकार की छवि उजागर करते हैं ? क्या हमारे धर्मिक महात्माओं, महंतों को इसके खिलाफ आवाज़ नही उठानी चाहिए और विभिन्न सरकारों को इसके खिलाफ कदम नही उठाने चाहिए ?

Reading these two observations we may figure out what trajectory Bihar is on. The purpose is not to engage in finger-pointing, but to try to find some way out.

Bihar has let a combination of problems pile up to such a gigantic extent that no one political party, or a caste or a leader can claim to have the magic wand to mitigate them.

Every hand will have to be on the deck and sooner we start the better. If a beginning is made today, it will take years to have the desired results.


Dr. Binoy Shanker Prasad hails from Darbhanga and currently resides with his family in Dundas, Ontario (Canada). A former UGC teacher fellow (at JNU) in India and Fulbright scholar in the USA, he has taught politics and authored conference papers, articles and chapters on Bihar in previously published books in the United States, India, and Canada.

Dr. Prasad administers a facebook page: https://www.facebook.com/OverseasBihari and has sponsored “Aware Citizenship Campaign” at a micro-level in his home-town.

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