हमारी सांस्कृतिक विरासत और दीपावली का त्यौहार

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भारत एक विशाल देश है जहाँ विभिन्न धर्मों व संप्रदायों को मानने वाले लोग रहते हैं। अतः यहाँ मनाए जाने वाले त्यौहार और पर्व भी अनेक हैं । ये त्यौहार जहाँ हमारे जीवन में आनंद, उमंग और उत्साह का संचार करते हैं, वहीं हमारी अद्भुत,अनमोल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करते हैं । 

Diwali images from Patna.Diwali images from Patna.वैसे तो प्रत्येक त्यौहार का अपना एक विशेष महत्व होता है, परंतु इन सब में दीपावली का त्यौहार अपनी एक अलग ही पहचान रखता है । यह त्यौहार प्रति वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। दीपावली शब्द दीप+अवली से मिलकर बना है जिसका अर्थ है दीपों की अवली या पंक्ति अथवा माला । इस त्यौहार पर घर-घर दीप जलाए जाते हैं, इसलिए इसका नाम दीपावली पड़ा।

इस त्यौहार को मनाने के कई धार्मिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक कारण हैं । कहते हैं, इस दिन श्रीरामचन्द्र जी चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण और उसकी लंका का संहारकर अयोध्या लौटे थे । अयोध्यावासियों ने उनके आगमन की खुशी में घी के दिये जलाकर उनका स्वागत किया था । तभी से यह त्यौहार प्रतिवर्ष दीप प्रज्वलित कर मनाया जाता है ।

Diwali images from Patna.Diwali images from Patna.

इस त्यौहार को मनाने के और भी अनेक संदर्भ हैं । एक कथा के अनुसार इस दिन महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ पूरा किया था। जैन धर्म के अनुयायियों के अनुसार इसी दिन जैन मत के प्रवर्त्तक महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था । कृष्ण भक्तों के अनुसार इस दिन से एक दिन पूर्व श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था तथा इसी दिन श्रीकृष्ण ने ब्रज प्रदेश को इंद्र के कोप से बचाया था।

एक मान्यता यह भी है कि इसी दिन समुद्र- मंथन हुआ था । समुद्र से लक्ष्मी के प्रकट होने पर देवताओं ने उसकी पूजा-अर्चना की । यह भी मान्यता है कि धनतेरस के दिन भगवान् विष्णु ने नरसिंह के रूप में प्रकट होकर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी । सिख धर्म को मानने वाले कहते हैं कि इसी दिन उनके छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी ने जेल से मुक्ति पाई थी । और भी कई कथाएं हैं जो इस त्यौहार के साथ जुडी हुयी हैं ।

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यों दीपावली एक मुख्य त्यौहार है मगर यह त्यौहार अपने साथ और भी कई छोटे-मोटे त्यौहार लाता है । दीपावली से दो दिन पहले त्रयोदशी के दिन धनतेरस मनायी जाती है । इस दिन लोग नए बर्तन खरीदते हैं । चर्तुदशी को ‘नरक चौदस’ तथा अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है । दीपावली से अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है । मान्यता है कि इस दिन कृष्णजी ने गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था । द्वितीया को भैया दूज मनाई जाती है ।

ध्यान से देखा जाय तो दीपावली की तैयारियां दशहरे के बाद से ही प्रारंभ हो जाती हैं । यह त्योहार वर्षा ऋतु के बाद आता है । लोग अपने घरों की सफाई, रंग-रोगन आदि शुरू कर देते हैं । व्यापारी वर्ग भी अपनी दुकानों तथा प्रतिष्ठानों की सफाई करवाते हैं । बाजारों में खूब चहल-पहल होती है । मिठाई, पटाखे, दीपक, मोमबत्तियां, कपड़े आदि सभी चीजों से बाजार सजे होते हैं । दीपावली के दिन दोपहर को लोग हनुमान जी की पूजा करते हैं क्योंकि कहते हैं हनुमानजी जी ही श्री रामजी, लक्ष्मण तथा सीता जी के अयोध्या लौटने का संदेश लेकर आए थे । घरों में भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते है । दीपावली से कुछ दिन पूर्व ही लोग अपने घरों को रोशनी से सजाना शुरू कर देते हैं । लोग खील-पताशे, मिठाईयां तथा आतिशबाजियां का सामन बड़े चाव से खरीदते हैं ।

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दीपावली का त्योहार खुशियों का त्यौहार है । यह हमें समाज में फैली अनेक बुराइयों के अंधकार को समाप्त कर अच्छाइयों के प्रकाश की ओर ले जाने हेतु प्रेरित करता है। यह जन-जन का पर्व है । छोटे-बड़े, धनी-निर्धन सब इस पर्व को पूरे उत्साह से मनाते हैं । बाजारों में रंग-बिरंगे खिलौनों की दुकानें सज जाती हैं । इस दिन बालकों का उत्साह अपने चरम पर दिखाई देता है । वे पटाखे चलाकर अपनी प्रसन्नता का परिचय देते हैं । मिठाई की दुकानों की सजावट दर्शनीय होती है । दीवाली की रात्रि का दृश्य अनुपम होता है । दीवाली अनेक दृष्टियों में महत्त्वपूर्ण पर्व है । व्यापारी लोग इस दिन को बड़ा शुभ मानते हैं । वे इस दिन अपनी बहियां बदलते हैं तथा नया व्यापार शुरू करते हैं । यह त्यौहार भावनात्मक एकता का भी प्रतीक है । प्रायः सभी धर्मो के लोग इस त्यौहार को मनाने में अपना योगदान करते हैं । इस दिन हमें यह निश्चय करना चाहिए कि केवल बाहर का प्रकाश ही नहीं हमें अपने हृदयों में भी सद्‌गुणों को आलोकित करना चाहिए तथा यह प्रयास करना चाहिए कि इस संसार में जहां कहीं भी गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा एवं बुराइयों का अंधेरा है, वह दूर हो । हमें ये पंक्तियां सदा याद रखनी चाहिए- 

दिये जलाओ पर रहे ध्यान इतना

अंधेरा धरा पर कहीं रह पाए

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भारत भूमि अपनी प्राकृतिक सुषमा के लिए संपूर्ण विश्व में अनूठी है और इसकी संस्कृति भी इसे गौरवान्वित करती है । समय-समय पर मनाए जाने वाले त्यौहार इसकी समृद्ध संस्कृति की विशेषता को दर्शाते हैं । प्रत्येक त्यौहार का अपना महत्त्व है । इन त्यौहारों के कारण भारत को त्योहारों का देश भी कहा जाता है । देखा जाय तो जीवन में त्यौहार औषधि का कार्य करते हैं । जिस प्रकार शरीर को निरोग रखने के लिए पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है उसी प्रकार तन-मन को स्वस्थ और प्रसन्न रखने के लिए त्यौहारों का होना भी आवश्यक है । अनादिकाल से मानव-जीवन उलझनों, कष्टों एवं समस्याओं से ग्रस्त रहा है। इनसे उबरने के लिए त्यौहार संजीवनी का काम करते हैं । ये मानव-हृदय में उल्लास और आनन्द का संचार करते हैं । भारत में वर्ष भर में अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं। इनमें से कई त्यौहारों का संबंध ऋतुओं से होता है तथा कई त्यौहार ऐतिहासिक घटनाओं एवं धार्मिक विश्वासों से जुडे हुए होते है । 

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कुल मिलकर दीपावली का प्रकाशोत्सव हमें सद्‌भावना, सदाचार एवं मेल-मिलाप का संदेश देता है । इसे पूर्ण निष्ठा,पवित्रता एवं उचित ढंग से मनाना चाहिए ताकि कोई अप्रिय घटना न हो एवं चारों ओर खुशियों एवं उल्लास का वातावरण बना रहे । कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तक चलने वाला दीपावली का यह त्यौहार सुख समृद्धि की वृद्धि, दरिद्रता का निवारण, स्वास्थ्य की प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि तथा लौकिक व पारलौकिक सुखों की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है । आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विचार करें तो दीपावली बंधन-मुक्ति का दिन है। व्यक्ति के अंदर अज्ञानरूपी अंधकार का साम्राज्य है। दीपक आत्म-ज्योति का प्रतीक है जिसे जला कर अपने अन्तस् को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित किया जा सकता है ताकि हृदय और मन जगमगा उठे।

दीपावली का पावन त्यौहार अकेले भारत में ही धूमधाम से नहीं मनाया जाता बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में यह दीप-पर्व अपनी छटा बिखेरता है। श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, मॉरीशस, केन्या, तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो, नीदरलैंड्स, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में भी दीपावली बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।


shiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 
http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html

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