शुरु करने के पहले ही आपको यह बताना चाहेंगे कि हम बचपन से ही पुलिस वालों के जबरदस्त फैन रहें हैं। हमारे सबसे पसंदीदा पुलिस अफसरों में अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, शत्रुघन सिन्हा, अक्षय कुमार, सलमान खान और अजय देवगन जैसे अभिनेताओं के द्वारा निभाए गए किरदार शामिल हैं। सिंघम से तो हम इतना प्रभावित हैं कि दोनो फिल्में कम से कम दस बार देखी होंगी। इन किरदारों से प्रभावित होना स्वाभाविक है – ये ईमानदार, कर्मठ और अच्छाई के प्रतीक के रूप में उभर कर आते हैं।

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I was traveling a few days back on Indian Railways and met with an unfortunate incident. Almost a week back, I wrote a letter to all the members of the Railway board narrating the entire incident and raising a few questions. While the letter is made public through my blog, I would like to take it to a larger audience using the platform of PatnaDaily.

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I was in Patna a few days back and what I saw was heartbreaking. Patna, in its present state, would easily qualify to be the dirtiest Capital City in India. And it is not the failure of the administration alone – it is the failure of the residents of the city as well. 

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I think my native city, Patna, needs a surgery. You may question my wisdom and have every right to do so – after all Patna of today is much different from Patna of a decade back.

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सुबह घर से बाहर निकले तो हवा को बदला हुआ पाया – आज वहमलिन नहीं थीन ही दम घोटने को लालायित। हमें आश्चर्य हुआकारण जानने की इच्छा भीहुई। उसे रोक कर पूछा – ‘ओ बावलीक्या हो गया है तुझेआज इतनी निर्मलइतनीस्वच्छ कैसे हैआज मुझे परेशान करने का मन नही कर रहा?’

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लीजिए भईहोली आ गई। जो हमें जानते हैं उन्हें पता है कियह हमारा सबसे पसंदीदा त्योहार है। बचपन से ही इस त्योहार नें हमें अपने आकर्षणपाशमें बाँध रखा है और अभी तक हमारा इससे मोहभंग नही हुआ है।

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हाल ही की बात है – हम अपने घनिष्ठ मित्र के विवाह समारोहमें सम्मिलित होकर बेंगलुरु (हम अभी भी बैंगलोर कहना ही पसंद करते हैं) से दिल्लीवापस लौटे थे। मध्यरात्रि में जब हमारा विमान दिल्ली की हवाईपट्टी पर उतर गया तोहमने उन शक्स को फोन मिलाया जो हमें नियमित रूप से टैक्सी सेवा प्रदान करते हैं।पता चला कि ड्राइवर से बात न हो पाने के कारण हमारी टैक्सी आ नही पाएगी - अत: हमेंअपना इंतजाम इस बार स्वयं ही करना पड़ेगा।

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It is not very often that I get time to ponder upon ‘Life’ and when I do I get stuck at some very basic elements. This might reflect poorly on me but the last time I tried to think about life, I got trapped by something as basic as ‘Emotion’. I realized that I do not even naively understand this simple word and yet I persisted (I have always been headstrong in that way).

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हम देख रहें हैं कि आजकल लोगों में इतिहास के प्रति रुझानबढ़ रहा है। एक हमारा समय था कि लगता था कि इतिहास से सिर्फ हमारा और कुछ गिने चुनेलोगों का ही लगाव है। हमारा लगाव इस कदर था कि ग्यारहवीं का फार्म भरते तक पिताजीने छूट दी थी कि आर्टस लें या साईंस (और इसके लिए हम उनके तहेदिल से शुक्रगुजारहैं)। पर हमने विज्ञान को चुना – सोचा इतिहास तो जो बनना था बन गया अब हमारे इतिहासबनाने का समय है।

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हिमाचल के साथ हमारा रिश्ता पुराना है – हमने अपनीइंजीनियरिंग यहीं से की है। प्राचीन इतिहास और अद्भुत सुंदरता को अपने अंदर समेटेयह धरती मानव (तथा देवों) को सदियों से आकृष्ट करते आई है। जाहिर सी बात है किहमारा परिवार भी इस देवभूमि को देखने को इच्छुक था। अभी हाल में ही उनकी यह इच्छापूरी हो गई। हमारे पिता तो एक बार हमारे साथ हिमाचल आए भी थे पर हमारी माँ एवं भाईके लिए यह भूमि नई थी।

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सच कहें तो हमें लगता है कि सोशल नेटवर्किंग’ मानव सभ्यताकी अब तक की सबसे क्रांतिकारी ईजाद है। बस कुछ सोचा ही कि वह फुर्र से हमारे जाननेवालों को पता चल जाता है। सोच तो प्रकाश से भी ज्यादा तेज हो सकती है - सोशलनेटवर्क’ उसमें भी बूस्टर लगा रहा है।

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हम लिखें इससे पहले ही हम स्पष्ट कर दें कि हम सेकुलर’ यानि कि धर्मनिरपेक्ष हैं।यह स्पष्ट करना निम्नलिखित कारणों से जरूरी हो जाता है: - पहला कि यह सत्य है – हमारा मानना है कि इंसान को उसकी सोच एवं आचरण से बाँटना चाहिए न कि उसके भगवान याजन्म के अनुसार। और दूसरा कि आज के माहौल का कोई ठीक नही है – पता नहीं कि कौनआकर यह आरोप लगा दे कि आपका यह लेख तो भई समाज में सांप्रदायिक अलगाव पैदा करने कीक्षमता रखता है।

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हम सिनेमा कला के वर्षो से प्रशंसक रहे हैं। जाहिर सी बातहैं कि इस विषय पर हमारी अपनी राय भी है जिसे हम कभी व्यक्त करते हैं और कभी अपनेतक ही सीमित रखते हैं। रोहित शेट्टी की फिल्मों के बारे में हमारा मानना है किउन्हे गंभीरता से लेने की कोई भी आवश्यक्ता नही है। सिनेमा के शौकिन होने के कारणहम यदा-कदा जब उनकी फिल्में देखने जाते भी हैं तो दिलोदिमाग ताक पर रख कर – पतानहीं कब कोई सीन खुराफात कर हमारे सिनेमाबोध पर बुरा असर छोड़ जाए। 

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