भाषाई अश्लीलता का प्रदुषण

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देश के वर्तमान परिपेक्ष में सबसे विश्वसनीय संस्था जो न्यायालय ही बच गयी है उसके एक अंग, एलाहाबाद उच्चतम न्यायालय के लखनौऊ खंडपीठ ने एक समादेश याचिका विचार के लिए स्वीकार कर ली है जिसमे आरोप लगाया गया है कि बहुजन समाज पार्टी के नेता के विरुद्ध भाजपा के एक नेता द्वारा कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग के विरुद्ध बहु. समा.पार्टी द्वारा संगठित विरोध प्रदर्शन में उनके समर्थकों नेअभद्र भाषा का प्रयोग किया जो कानून एवम संविधान के विरुध है.

उधृत याचिका एक 57 वर्षीया महिला ने ये कहते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है कि उनके नाबालिग बच्चे ने विरोध प्रदर्शन में प्रयोग किये गए आपतिजनक व् अश्लील शब्दों के प्रयोग का अर्थ जब उनसेपूछा तो बच्चों के प्रश्नों का उत्तर देने में उन्हें काफी कठिनाई हुयी.

न्यायालयने सज्ञान लेते हुए अपनी टिपण्णी दी कि अभिव्यक्ति व विरोध की आजादी के नाम पर अश्लील भाषा काप्रयोग आम आदमी अवं बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन है .

लेकिन मेरा न्यायलय से निवेदन है कि कृपया हमारे देश के चलचित्रों में भी प्रयोग किये जाने वाले कुछ संवाद /गाने जैसे कि सलमान खान के एक फिल्म में प्रयुक्तमैं तुममें इतने छेड़ कर दूँगा की कन्फ्युज हो जावोगे कि सांस कहाँ से लें और........कहाँ सेया चोली के पीछे क्या है....पर भी एक नज़र डाले.

बिहार से लोगों के पलायन के पीछे भी भाषाई अश्लील प्रयोगएक बहुत बड़ा मुद्दा है . मादर...... व बहन ......तो उल्हास में भी सामान्य रूप से प्रयोग होता है यहाँ. कुछ लोग मानते हैं कि इसके प्रयोग के बिना हमारे कथनमें ओज यावजन नहीं आता. नितीश जी के शराब निर्मूलन कार्यक्रम से ऐसे शब्द थोडा कम सुनने या सुनाने को मिल रहे थे लेकिन लालू जी के आज के वयान से कि ताड़ी पर कोई पाबन्दी नहीं है, इन अर्ध मृत शब्दों में नयी उर्जा का सृजन होने की संभावना बन रही है.

भाषाई गिरावट का यह दौर नया नहीं है लेकिन न्यायलय का यह प्रयत्न अवश्य नवीन है. परन्तु इसे यदि दंड संहिता के अधीन विचार किया जायेगा तो इसे रोकना कतई संभव नहीं है. इन अश्लील शब्दों का प्रयोग बच्चे अपने बड़ों से सीखते हैंऔर समाज उन प्रभावशालीलोगों से जिनका वो नक़ल करता है और राजनैतिक नेता उनमे सबसे अव्वल हैं. क्योंकि उन्हें लगताहै, और लगता ही नहीं, एसा है कि कानून उनकी चेरी है .

देश और आनेवाली पीढ़ी के लिए के लिए यह ऐतिहासिक होगा यदि न्यायलय यह व्यवस्था दे कि ऐसे राजनेता और ऐसे  राजनैतिक गिरोह (उन्हें पार्टी कहना उचित नहीं लगता) कोअपने विचारों को प्रस्तुत करने के लिए निर्मित उनके मंचो को अवैध करार देते हुए इनके निर्वाचन एवम सामाजिक मंचों से इनके भाषण पर प्रतिबन्ध लगाया जाय यदि वो ऐसी अश्लील शब्दों का प्रयोग करते पाए गए तो. ऐसे लोगों को सरकारी पदों के अवं निर्वाचन के लिय अयोग्य घोषित किया जाये.

नेता का कर्त्तव्य होता है अपने समर्थकों का नियंत्रण करना. उनके समर्थकों द्वारा यदि किसी का अपमान होता है तो उसे संयुक्त गुनाहों (vicarious crime) की श्रेणी में रखा जाये एवम उस पार्टी का पंजीकरण निरस्त करते हुए उसके नेता को व्यैक्तिक रूप से चुनाव के लिए अयोग्य घोषित किया  जाना चाहिए क्योंकि अर्थ दंड या न्यायायिक दंड से इन्हे सुधार पाना असंभव है.

इस पर विस्तृत रूप से विचार करने की आवयश्कता है.

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