एक बार फिर दिल्ली के निर्भया कांड की याद ताजा हो गयी। इस बार यह घृणित कृत्य मन्दसौर में एक मनुष्य-रूपी हैवान ने अंजाम दिया।

कुछ समझ में नहीं आ रहा कि कठोर दंड के प्रावधान के बावजूद यौनापराध दिनोंदिन बढ़ते क्यों जा रहे हैं? या तो अपराधी दंडित होता नहीं है या फिर कानूनी दांवपेच में फंसकर बलात्कारी को बचने का अवसर मिल जाता है। छोटी बालिकाओं के साथ हुए जबरन बलात्कार की सज़ा मृत्यु दंड है। अतः ऐसे प्रकरणों में अविलम्ब न्यायिक जांच होनी चाहिए और अपराधी को तुरन्त फांसी पर लटकाया जाना चाहिए। बलात्कार के ऐसे मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतें गठित होनी चाहिये ताकि तुरत-फुरत अपराधी को सज़ा सुनाई जा सके।

प्रायः होता यह है कि मामले की उत्तेजना कुछ दिनों तक रहती है और बाद में प्रकरण ठंडा पड़ जाता है। लिहाजा, अपराधी को समय गंवाए कानून के अधीन जितनी जल्दी हो, सूली पर लटकाया जाना चाहिए। जब तक समाज में 'भय' नहीं रहेगा,ये मनुष्य-रूपी पिशाच ऐसे ही बेखौफ मासूम बच्चियों को अपना शिकार बनाते रहेंगे।

वैसे ध्यान देने वाली बात यह भी है कि कुछेक माह पहले जम्मू-कश्मीर के 'कठुआ रेप मामले' को लेकर पूरे देश के मीडिया ने खूब छाती कूटी थी, खूब आसमान सर पर उठा लिया था। कविजनों ने रेप पीड़िता आरिफा की सोगवारी में कविताएं भी लिख  डालीं थीं। मगर मन्दसौर की घटना पर जैसे इन सभी को सांप सूंघ गया हो। छिटपुट तौर पर घटना की भर्त्सना ज़रूर हो रही है, मगर मीडिया में वह हल्ला नहीं जो कठुआ के मामले में देखने को मिला था।


shiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 


http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html