इतिहास गवाह है कि दुनिया में हमेशा शक्तिशाली देश अथवा योद्धा ने राज किया है। माला जपने, मंत्रोच्चार और शांति-उपदेशों से लड़ाइयां नहीं जीती जा सकती। समय आ गया है जब शठ को शठता से ही निपटना होगा। सांप काटे नहीं मगर फूत्कारे तो सही।

इज़राईल जैसा छोटा देश चारों ओर से दुश्मनों से घिरा है मगर अपनी सैन्य क्षमता, जुझारूपन और आक्रमकता से सभी पड़ोसी देश उससे ख़ौफ़ खाते हैं। वह भी शांति, अमन, पीस आदि की बात करता तो उसका वजूद ही खत्म हुआ होता। इस्लामी अथवा तालिबानी आतंकवाद इसलिए परवान चढ़ा क्योंकि इसको चुनौती देने वाला कोई दूसरा संगठन तैयार नहीं हुआ।

कश्मीर में अगर पंडितों को अपनी आत्मरक्षा के लिए अस्त्र-शस्त्र दिए गए होते, इन को चलाने की ट्रेनिंग दी गयी होती और वे संख्या में तनिक ज़्यादा होते तो क्या मजाल थी कि उन्हें घाटी से खदेड़ा जाता। मगर बात फिर वही आकर अटक जाती है कि हम अहिंसा के पुजारी हैं, अस्त्र-शस्त्र उठाना पाप है । संभवतः इसी मानसिकता की वजह से हम सदियों तक गुलाम बने रहे।

एक बात और। जातियों अथवा संप्रदायों के वोट किसी भी पार्टी के लिए वोट बैंक का काम करते हैं। उनको रियायतें देकर अपनी ओर करना हर पार्टी का चलन रहा है। पहले से होता आ रहा है। अब भी अगर हो रहा है तो कोई नई बात नहीं हैं। शाहबानो का उदाहरण हमारे सामने है। वोट सत्ता दिलाते हैं और सत्ता कुर्सी और पद। बाद में चेले-चपेटे भी लाभान्वित हो जाते हैं। देश में आज घमासान इसी लिए मचा हुआ है।


shiben rainaDr. Shiben Krishen Raina
Currently in Ajman (UAE)
Member, Hindi Salahkar Samiti,
Ministry of Law & Justice (Govt. of India)
Senior Fellow, Ministry of Culture (Govt. of India)

Dr. Raina's mini bio can be read here: 
http://www.setumag.com/2016/07/author-shiben-krishen-raina.html